प्रयागराज। मोहर्रम के अवसर पर शहर में कदीमी दुलदुल, अलम और ताबूत का पारंपरिक जुलूस श्रद्धा और अकीदत के साथ निकाला गया। जुलूस के दौरान पूरे क्षेत्र का माहौल गमगीन रहा और जगह-जगह से “या हुसैन” की सदाएं गूंजती रहीं।

हजरत इमाम हुसैन और करबला के शहीदों की याद में निकाले गए इस जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। जुलूस अपने निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए विभिन्न इमामबाड़ों और प्रमुख स्थलों तक पहुंचा। इस दौरान लोगों ने मातम कर करबला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की।
जुलूस में शामिल दुलदुल (हजरत इमाम हुसैन के घोड़े की प्रतीकात्मक सवारी), अलम और ताबूत आकर्षण का केंद्र रहे। श्रद्धालुओं ने अलम को सलाम किया और करबला की कुर्बानी को याद करते हुए शांति, भाईचारे और इंसानियत का संदेश दिया।
सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद रहा। प्रमुख चौराहों और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था, जिससे जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
धार्मिक विद्वानों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष, सत्य और इंसाफ के लिए दी गई कुर्बानी की याद दिलाने वाला अवसर है। करबला का संदेश आज भी पूनम रिपोर्ट



