सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 4 साल की बच्ची का इलाज ठुकराने वाले अस्पताल पर 12 लाख रुपये का जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में चार साल की बच्ची को आपातकालीन इलाज देने से इनकार करने वाले निजी अस्पताल को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि किसी भी अस्पताल या डॉक्टर का पहला कर्तव्य मरीज की जान बचाना है। कोर्ट ने अस्पताल को 12 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश देते हुए कहा कि इस तरह की लापरवाही को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि यदि अस्पताल में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं, तब भी डॉक्टरों की जिम्मेदारी थी कि वे बच्ची को तुरंत किसी दूसरे अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था करते। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्थिक स्थिति या भुगतान की क्षमता के आधार पर किसी मरीज का इलाज टालना मानवीय और चिकित्सकीय दोनों दृष्टि से गलत है।
यह मामला उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की उस चार वर्षीय बच्ची से जुड़ा है, जिसे गंभीर हालत में दो निजी अस्पतालों में ले जाया गया था। आरोप है कि समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उसकी जान नहीं बच सकी। अदालत पहले भी इस मामले में पुलिस जांच और अस्पतालों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठा चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आपातकालीन चिकित्सा सेवा देना हर अस्पताल और डॉक्टर की कानूनी तथा नैतिक जिम्मेदारी है। अदालत ने उम्मीद जताई कि इस फैसले से भविष्य में अस्पताल ऐसे मामलों में अधिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ काम करेंगे।
Poonam Report



