बांदा कृषि विश्वविद्यालय में छात्र सीख रहे नर्सरी प्रबंधन और स्वरोजगार का हुनर

बांदा। बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के उद्यान महाविद्यालय के अंतिम वर्ष के बीएससी उद्यानिकी के छात्र-छात्राएं एक्सपीरिएंशियल लर्निंग प्रोग्राम (ईएलपी) के तहत नर्सरी प्रबंधन और स्वरोजगार से जुड़ा व्यावहारिक प्रशिक्षण ले रहे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रायोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव देकर आत्मनिर्भर बनने के लिए तैयार करना है।
उद्यान महाविद्यालय के फ्लोरीकल्चर एंड लैंडस्केप आर्किटेक्चर विभाग की ओर से संचालित ‘नर्सरी प्रोडक्शन एंड वैल्यू एडिशन ऑफ फ्लावर्स’ पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को पौधों की नर्सरी तैयार करने, उनकी देखभाल, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग और बाजार में बिक्री तक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह कार्यक्रम ‘अर्न व्हाइल यू लर्न’ की अवधारणा पर आधारित है।
ईएलपी प्रभारी डॉ. अमित कनौजिया की देखरेख में छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में सजावटी, पुष्पीय और व्यावसायिक पौधों की नर्सरी तैयार की। विद्यार्थियों ने गेंदा, कॉसमॉस, सेलोशिया, जिनिया, सनफ्लावर और कोचिया जैसे पौधों की पौध तैयार की। इसके अलावा बोगेनवेलिया, फाइकस, तुलसी, कनेर और गुड़हल जैसे बहुवर्षीय पौधों की कटिंग भी तैयार की गई। छात्रों ने इन पौधों की विश्वविद्यालय परिसर के साथ-साथ बांदा शहर में जाकर मार्केटिंग की।
प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने फूलों और पौधों से कई मूल्यवर्धित उत्पाद भी तैयार किए। इनमें हर्बल गुलाल, हर्बल टी, सूखे फूलों से ईयररिंग्स, चाबी के छल्ले, फ्लोरल फ्रेम और धूपबत्ती शामिल हैं। विद्यार्थियों ने इन उत्पादों की पैकेजिंग, सजावट और मार्केटिंग की जिम्मेदारी भी स्वयं संभाली। उत्पादों की बिक्री से उन्हें व्यावसायिक अनुभव के साथ आय अर्जित करने का अवसर मिला।
उद्यान महाविद्यालय के डीन डॉ. सत्यव्रत द्विवेदी ने छात्रों के प्रयासों की सराहना की। फ्लोरीकल्चर विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्री तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार मांगने के बजाय रोजगार देने की दिशा में तैयार करना है। उनके अनुसार नर्सरी प्रबंधन और फ्लोरीकल्चर के क्षेत्र में स्वरोजगार की संभावनाएं हैं।
ईएलपी प्रभारी डॉ. अमित कनौजिया ने बताया कि नर्सरी उत्पादन और सजावटी पौधों के मूल्य संवर्धन के माध्यम से युवा आय अर्जित कर सकते हैं। विद्यार्थियों ने भी बताया कि प्रैक्टिकल कोर्स से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। नर्सरी तैयार करने से लेकर उत्पाद बनाने और उन्हें बाजार में बेचने तक का अनुभव उन्हें मिला है। साथ ही टीम के रूप में काम करने, ग्राहकों से संवाद करने और उत्पादों की मार्केटिंग का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हुआ।
Poonam Report



