जादवपुर यूनिवर्सिटी में दीवारों पर ग्रैफिटी को लेकर वीसी की अपील, बोले- विचार व्यक्त करने के लिए सोशल मीडिया का करें इस्तेमाल
कोलकाता। जादवपुर यूनिवर्सिटी के कैंपस में दीवारों पर राजनीतिक और सामाजिक संदेश लिखने को लेकर विवाद के बीच कुलपति डॉ. चिरंजीब भट्टाचार्य ने छात्रों और शिक्षकों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में विचारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति की पुरानी परंपरा है, लेकिन कैंपस की दीवारों को लगातार लिखावट और ग्रैफिटी से भरने के बजाय छात्र अपने विचार सोशल मीडिया के जरिए भी सामने रख सकते हैं।
कुलपति ने स्पष्ट किया कि उनकी अपील का उद्देश्य छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को रोकना नहीं है। उनका कहना है कि जादवपुर यूनिवर्सिटी की पहचान लंबे समय से स्वतंत्र विचार और बहस की परंपरा से जुड़ी रही है। इसी परंपरा को बनाए रखते हुए विश्वविद्यालय परिसर को साफ, शांत और व्यवस्थित रखना भी जरूरी है।
दरअसल, पिछले दिनों यूनिवर्सिटी कैंपस की कुछ दीवारों पर बनी ग्रैफिटी को विश्वविद्यालय प्रशासन ने हटाया और कई हिस्सों में दीवारों पर सफेदी कराई गई। इसके बाद कुछ छात्र संगठनों ने इन दीवारों पर दोबारा लिखावट और ग्रैफिटी बनाकर अपने विरोध और विचारों को दर्ज किया। छात्रों की ओर से दीवारों को फिर से अपने विचार व्यक्त करने की जगह के रूप में इस्तेमाल करने की मुहिम भी सामने आई।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कुलपति ने कहा कि मौजूदा समय में छात्रों के पास सोशल मीडिया जैसे कई डिजिटल माध्यम मौजूद हैं, जहां वे अपने राजनीतिक और सामाजिक विचार व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचा सकते हैं। उनका सुझाव है कि दीवारों पर लगातार लिखने के बजाय इन माध्यमों का इस्तेमाल किया जाए, ताकि अभिव्यक्ति भी बनी रहे और विश्वविद्यालय परिसर की साफ-सफाई तथा सुंदरता भी प्रभावित न हो।
जादवपुर यूनिवर्सिटी में दीवारों पर राजनीतिक और सामाजिक संदेश लिखने की परंपरा काफी पुरानी रही है। इसलिए हालिया विवाद केवल दीवारों की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कैंपस में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, छात्र राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। प्रशासन की ओर से जहां परिसर की व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है, वहीं छात्र संगठनों की ओर से दीवारों को अपनी बात रखने की पारंपरिक जगह के रूप में देखा जा रहा है।
कुलपति की अपील के बाद अब यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है कि विश्वविद्यालय परिसर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कैंपस की स्वच्छता एवं व्यवस्था के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाए। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि विचारों की अभिव्यक्ति जारी रहनी चाहिए, लेकिन इसके लिए ऐसे माध्यमों को बढ़ावा दिया जा सकता है जिनसे कैंपस की दीवारों और सार्वजनिक ढांचे को नुकसान न पहुंचे।
Poonam Report



