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पश्चिमी घाट में इको-सेंसिटिव जोन का प्रस्ताव: करीब 3,000 गांव हो सकते हैं प्रभावित

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केंद्र सरकार ने पश्चिमी घाट (Western Ghats) को पर्यावरणीय दृष्टि से अधिक सुरक्षित बनाने के लिए इको-सेंसिटिव एरिया (ESA) का नया मसौदा (सातवां ड्राफ्ट) जारी किया है। प्रस्ताव के अनुसार, लगभग 56,825 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को इको-सेंसिटिव जोन घोषित किया जा सकता है। इसका असर करीब 3,000 गांवों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

प्रस्तावित इको-सेंसिटिव जोन में नई खनन गतिविधियों, स्टोन क्वॉरी, रेड कैटेगरी के प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों, नए थर्मल पावर प्लांट और बड़े निर्माण कार्यों जैसी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर प्रतिबंध या कड़े नियम लागू किए जा सकते हैं। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य पश्चिमी घाट की जैव विविधता, वन संपदा और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना है।

हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर कुछ राज्यों और स्थानीय लोगों ने चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि इससे विकास कार्यों और आजीविका पर असर पड़ सकता है। केंद्र सरकार ने मसौदे पर 60 दिनों तक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इसके बाद प्राप्त सुझावों की समीक्षा कर अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।

Poonam Report

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