उत्तर प्रदेशकन्नौजबड़ी खबर

कन्नौज की इत्र विरासत से पर्यटन को मिल रही नई पहचान

कन्नौज अपनी सदियों पुरानी इत्र निर्माण परंपरा, ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक स्थलों के कारण पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। ‘भारत की इत्र राजधानी’ के रूप में प्रसिद्ध कन्नौज 18 सितंबर को अपने स्थापना दिवस का उत्सव मनाने जा रहा है। वर्ष 1997 में तत्कालीन फर्रुखाबाद से अलग होकर कन्नौज स्वतंत्र जिला बना था। इत्र की पारंपरिक कला को पर्यटन से जोड़ते हुए यहां ‘परफ्यूम टूरिज्म’ को बढ़ावा दिया जा रहा है।

कन्नौज की पहचान गुलाब, केवड़ा और प्राकृतिक सुगंध से तैयार होने वाले इत्र के साथ जुड़ी हुई है। यहां सदियों पुरानी ‘देग-भपका’ विधि से इत्र तैयार किया जाता है। इस पारंपरिक प्रक्रिया में कारीगर अनुभव और कौशल के जरिए सुगंध तैयार करते हैं। पर्यटक कन्नौज पहुंचकर इत्र बनाने की इस पारंपरिक कला को करीब से देखने और समझने में रुचि ले रहे हैं।

कन्नौज के इत्र को वर्ष 2014 में जीआई टैग भी मिला था। पर्यटन विभाग की ओर से कन्नौज की इत्र निर्माण परंपरा को देश-विदेश के विभिन्न मंचों पर प्रदर्शित किया जाता रहा है। लंदन वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट और इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर सहित कई व्यापार मेलों में कन्नौज की इत्र विरासत को प्रस्तुत किया गया है। इस पारंपरिक इत्र निर्माण कला को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल कराने के प्रयास भी जारी हैं।

इत्र के अलावा कन्नौज का इतिहास भी काफी समृद्ध है। प्राचीन काल में इसे कन्य कुब्ज और महोधी जैसे नामों से जाना जाता था। सातवीं सदी में सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल में कन्नौज को महत्वपूर्ण राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र का स्थान प्राप्त था। यहां मौजूद पुरातात्विक संग्रहालय में आठवीं और नौवीं शताब्दी की कई ऐतिहासिक मूर्तियां और कलाकृतियां संरक्षित हैं।

कन्नौज में मेहंदी घाट, राजा जयचंद का किला, लाख बहोसी पक्षी विहार, एफएफडीसी, राम-जानकी मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर, गौरी शंकर मंदिर और पुरातत्व संग्रहालय जैसे स्थल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। गंगा किनारे मेहंदी घाट से दाईपुर घाट के बीच गंगा डॉल्फिन की मौजूदगी और विकसित हो रहा परफ्यूम पार्क भी पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ा रहा है।

पर्यटन विभाग के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास मद से कन्नौज की चार परियोजनाओं के लिए 10.76 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि स्वीकृत हुई। इसमें ऐदखेड़ा शिव मंदिर हरभानपुर, बाबा विश्वनाथ मंदिर चौधरियापुर बांगर, च्यवनऋषि आश्रम गुगरापुर और मेहंदीघाट के पर्यटन विकास से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।

वित्त वर्ष 2026-27 में भी धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए तीन प्रमुख परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया है। इस्माइलपुर के ऐतिहासिक शंकर जी मंदिर, खास नगर के सिद्धपीठ प्राचीन दौलेश्वर नाथ शिव मंदिर और जलालाबाद स्थित मां शीतला देवी मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 1.30-1.30 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं।

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में कन्नौज में 21.73 लाख से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार धार्मिक, ऐतिहासिक और इको टूरिज्म के साथ कन्नौज की इत्र परंपरा को जोड़कर पर्यटन को नए आयाम देने का प्रयास किया जा रहा है। ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान के जरिए युवाओं को भी कन्नौज की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

Poonam Report

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button