Operation Mahadev: पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड हाशिम मूसा फौजी मुठभेड़ में ढेर, दाचीगाम के जंगल में चला था घंटों तक ऑपरेशन
श्रीनगर, 23 जुलाई 2025 — जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ एक और बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षाबलों ने दाचीगाम वन क्षेत्र में चले ऑपरेशन के दौरान पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड और पूर्व सैनिक हाशिम मूसा फौजी को मुठभेड़ में मार गिराया।
यह कार्रवाई भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष बलों द्वारा संयुक्त रूप से की गई। यह ऑपरेशन “महादेव” के नाम से चलाया गया, जो पिछले कुछ दिनों से वांछित आतंकियों के सफाए के लिए शुरू किया गया था।
कैसे शुरू हुआ ऑपरेशन?
खुफिया एजेंसियों को पक्की सूचना मिली थी कि हाशिम मूसा दाचीगाम के घने जंगलों में अपने साथियों के साथ छिपा हुआ है। सूचना मिलते ही इलाके को चारों ओर से घेर लिया गया और मंगलवार सुबह 4 बजे के आसपास ऑपरेशन शुरू हुआ।
करीब चार घंटे तक चली मुठभेड़ में दो ओर से गोलियां चलीं। जंगल की ढलानों और चट्टानों का फायदा उठाकर आतंकी छिपते रहे, लेकिन ड्रोन और थर्मल इमेजिंग की मदद से उनकी सटीक लोकेशन का पता लगाया गया।
कौन था हाशिम मूसा फौजी?
हाशिम मूसा मूल रूप से पुलवामा जिले का निवासी था।
वह पहले भारतीय सेना में तैनात था लेकिन सेवा के बाद कट्टरपंथी संगठनों से जुड़ गया।
पिछले कुछ सालों में उसने कई स्थानीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाया और आतंकी संगठन के लिए भर्ती की।
14 जुलाई 2025 को अमरनाथ यात्रा के दौरान पहलगाम में हुए आतंकी हमले का मास्टरमाइंड वही था, जिसमें सुरक्षाबलों को निशाना बनाया गया था।
मुठभेड़ के बाद क्या मिला?
मुठभेड़ स्थल से:
एक AK-47 राइफल
ग्रेनेड, बुलेट प्रूफ जैकेट
सैटेलाइट फोन और जीपीएस डिवाइस
कई कोडेड दस्तावेज और नक्शे बरामद किए गए हैं।
इन दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट हुआ है कि वह श्रीनगर और कटरा मार्ग पर हमले की साजिश रच रहा था।
सेना और पुलिस का बयान
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,यह ऑपरेशन आतंकवाद के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। हाशिम मूसा जैसे प्रशिक्षित और खतरनाक आतंकी का मारा जाना बड़ी सफलता है।”
वहीं जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी ने भी प्रेस कांफ्रेंस में पुष्टि की कि ऑपरेशन के दौरान किसी नागरिक को कोई नुकसान नहीं हुआ और यह पूरा मिशन प्रोफेशनल तरीके से अंजाम दिया गया।
आतंकियों का बदलता चेहरा
हाशिम मूसा जैसे आतंकी, जो सेना से निकलकर दुश्मन के हाथों में चले जाते हैं, आंतरिक सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक माने जाते हैं। ऐसे मामलों पर एजेंसियां अब और सख्ती से निगरानी कर रही हैं।



