
मणिपुर: 2 साल पहले हिंसा भड़कने के बाद पहला दौरा; विपक्ष ने उठाए सवाल
इंफाल। मणिपुर में दो साल पहले हुई भीषण हिंसा के बाद पहली बार किसी बड़े राजनीतिक दल या शीर्ष नेता का दौरा हुआ है। इस दौरे को लेकर जहां राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है, वहीं विपक्ष ने कई सवाल उठाते हुए इसे ‘देर से उठाया गया कदम’ बताया है।
पृष्ठभूमि: दो साल पुराना जख्म
मणिपुर में दो साल पहले जातीय और साम्प्रदायिक तनाव के चलते भीषण हिंसा भड़की थी। इस हिंसा में बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे और हजारों परिवारों को विस्थापित होना पड़ा था। कई गांव जल गए, घरों से लोग पलायन करने को मजबूर हुए। तब से राज्य के कई हिस्सों में असुरक्षा और अविश्वास का माहौल बना हुआ है।
पहला दौरा और संदेश
अब जाकर किए गए इस दौरे को लेकर कहा जा रहा है कि इसका मकसद स्थानीय लोगों के बीच भरोसा बहाल करना और राज्य में शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। दौरे के दौरान पीड़ित परिवारों से मुलाकात, पुनर्वास कैंपों का निरीक्षण और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की गई।
विपक्ष का हमला
विपक्षी दलों ने सवाल उठाया है कि आखिरकार इतने लंबे इंतजार के बाद यह दौरा क्यों किया गया? उनका कहना है कि अगर सरकार ने समय रहते कदम उठाए होते तो हालात इतने बिगड़ते ही नहीं। विपक्ष ने इसे ‘राजनीतिक दौरा’ करार देते हुए जनता को भरोसे में लेने की मांग की है।
लोगों की उम्मीदें
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल दौरा ही काफी नहीं है। उन्हें रोजगार, पुनर्वास, शिक्षा और सुरक्षा की ठोस गारंटी चाहिए। कई पीड़ित अब भी कैंपों में रह रहे हैं और सामान्य जीवन की ओर लौटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं
मणिपुर का यह दौरा शांति और स्थिरता की दिशा में एक अहम कदम जरूर है, लेकिन क्या यह सच में राज्य के हालात बदल पाएगा? यह देखने वाली बात होगी।



