
दिल्ली ब्लास्ट मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए विशेष अदालत ने डॉ. शाहीन समेत पांच आरोपियों को NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) की कस्टडी में भेज दिया है। एजेंसी ने कोर्ट से आरोपियों की कस्टडी की मांग करते हुए कहा था कि साजिश, नेटवर्क और फंडिंग से जुड़े कई अहम पहलुओं की जांच अभी बाकी है। अदालत ने दलीलें सुनने के बाद NIA को सीमित अवधि की कस्टडी प्रदान कर दी।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों से पूछताछ में ब्लास्ट की योजना, भूमिका बंटवारे, विस्फोटक सामग्री की व्यवस्था और संपर्कों को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। NIA का दावा है कि इस मामले में स्थानीय मदद से लेकर संभावित अंतरराज्यीय कनेक्शन तक की जांच की जा रही है।
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क्या-क्या खंगाल रही है NIA
ब्लास्ट की साजिश कब और कहां रची गई
विस्फोटक सामग्री की खरीद और सप्लाई चेन
आरोपियों के डिजिटल साक्ष्य (मोबाइल, लैपटॉप, चैट्स)
संभावित फंडिंग और ओवरग्राउंड वर्कर्स की भूमिका
एजेंसी का कहना है कि कस्टडी के दौरान आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की परतें खोली जाएंगी।
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सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली समेत कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या आरोपियों का संबंध किसी बड़े आतंकी मॉड्यूल से है या यह एक सीमित साजिश थी।
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अदालत की टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि जांच शुरुआती चरण में है और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में विस्तृत पूछताछ जरूरी होती है। इसी आधार पर NIA को कस्टडी दी गई है, साथ ही एजेंसी को तय समयसीमा में प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश भी दिया गया है।



