खामेनेई के लिए कहीं आखिरी गलती न बन जाए? इरफान सुल्तानी को चौराहे पर फांसी की अटकलों से ईरान में उबाल

ईरान की सियासत एक बार फिर उबाल पर है। इरफान सुल्तानी को सार्वजनिक चौराहे पर फांसी दिए जाने की संभावित तैयारी ने न सिर्फ देश के भीतर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल मचा दी है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह फैसला अमल में आया, तो यह सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक भूल साबित हो सकती है।
इरफान सुल्तानी पर सरकार विरोधी गतिविधियों, कथित साजिश और “राष्ट्र-विरोधी नेटवर्क” से जुड़े होने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, और मुकदमे की प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी नहीं उतरती।
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सार्वजनिक फांसी क्यों बन रही है विवाद का केंद्र?
ईरान में सार्वजनिक फांसी का इतिहास पुराना है, लेकिन मौजूदा हालात इसे बेहद संवेदनशील बना रहे हैं।
देश पहले से आर्थिक संकट, प्रतिबंधों और आंतरिक असंतोष से जूझ रहा है
युवा वर्ग और सुधारवादी तबके में सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है
सोशल मीडिया पर इरफान सुल्तानी के समर्थन में अभियान तेज हो चुका है
विशेषज्ञों का कहना है कि चौराहे पर फांसी जैसी सजा डर पैदा करने के बजाय विरोध को और भड़का सकती है।
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अंतरराष्ट्रीय दबाव और मानवाधिकार सवाल
यूरोपियन यूनियन, संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन पहले ही ईरान से फांसी की सजा पर रोक लगाने की अपील कर चुके हैं। अगर इरफान सुल्तानी को सार्वजनिक रूप से फांसी दी जाती है, तो—
ईरान पर नए प्रतिबंध लग सकते हैं
पश्चिमी देशों के साथ तनाव और बढ़ेगा
कूटनीतिक बातचीत के रास्ते और संकरे हो सकते हैं
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खामेनेई के सामने मुश्किल फैसला
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, खामेनेई इस समय दोहरी चुनौती से घिरे हैं—
एक तरफ सत्ता का कठोर संदेश, दूसरी तरफ बढ़ता जनाक्रोश और अंतरराष्ट्रीय दबाव।
अगर उन्होंने सख्ती दिखाई, तो आंतरिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
और अगर नरमी बरती, तो कट्टरपंथी खेमे में कमजोरी का संदेश जा सकता है।
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आगे क्या?
फिलहाल ईरानी प्रशासन की ओर से अंतिम फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह की तैयारियों और बयानबाजी सामने आ रही है, उसने माहौल को बेहद तनावपूर्ण बना दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि खामेनेई कौन-सा रास्ता चुनते हैं—सख्ती का या संयम का।
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Poonam Report



