
राज्य में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। बार का लाइसेंस जारी करने के बदले 80 लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में एक्साइज विभाग के डिप्टी कमिश्नर समेत तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के मुताबिक, एक बार संचालक ने लाइसेंस नवीनीकरण/जारी कराने के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के नाम पर एक्साइज विभाग के अधिकारियों ने उससे 80 लाख रुपये की मांग की। रिश्वत की रकम किस्तों में लेने की भी बातचीत हुई थी। परेशान होकर संचालक ने मामले की शिकायत सतर्कता/एंटी करप्शन एजेंसी से की।
शिकायत की सत्यता की जांच के बाद टीम ने जाल बिछाया और रंगे हाथ रिश्वत लेते हुए डिप्टी कमिश्नर सहित तीन कर्मचारियों को पकड़ लिया। गिरफ्तारी के दौरान दस्तावेज और नकदी भी बरामद की गई है। प्रारंभिक जांच में लाइसेंस प्रक्रिया में जानबूझकर देरी करने और दबाव बनाने के सबूत मिले हैं।
एजेंसी अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और यह भी जांच की जा रही है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। जरूरत पड़ने पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। वहीं, एक्साइज विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को गंभीर बताते हुए विभागीय जांच के संकेत दिए हैं।
इस कार्रवाई के बाद राज्य में लाइसेंस प्रक्रिया की पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर फिर से बहस तेज हो गई है। आम लोगों और कारोबारियों ने उम्मीद जताई है कि ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई से सिस्टम में सुधार होगा।
पूनम रिपोर्ट



