CM योगी का बड़ा संकल्प
अनावश्यक नियमों की जंजीरें तोड़ें, भरोसे पर आधारित प्रशासन बनाएं

लखनऊ।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक सुधारों को लेकर बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि शासन-प्रशासन अनावश्यक नियमों, जटिल प्रक्रियाओं और बेवजह की बंदिशों से बाहर निकले। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से आह्वान किया कि जनता और उद्यमियों पर अविश्वास नहीं, बल्कि भरोसे पर आधारित प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की जाए।
मुख्यमंत्री योगी एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नियम बनाना नहीं, बल्कि ऐसे नियम तैयार करना है जो जनता की राह आसान करें। अनावश्यक कानून और प्रक्रियाएं विकास की गति को बाधित करती हैं और निवेश के रास्ते में रुकावट बनती हैं।
अधिकारियों को सख्त संदेश
सीएम योगी ने दो टूक कहा कि जिन नियमों की अब कोई उपयोगिता नहीं रह गई है, उन्हें समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि विभाग अपने-अपने स्तर पर पुराने, अप्रासंगिक और जटिल नियमों की समीक्षा करें और उन्हें सरल, पारदर्शी एवं जनहितकारी बनाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को देश का सबसे बड़ा निवेश गंतव्य बनाने के लिए प्रशासन में विश्वास का माहौल बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईमानदार उद्योगपति, व्यापारी और आम नागरिक को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें, यही सरकार की प्राथमिकता है।
डिजिटल गवर्नेंस पर जोर
सीएम योगी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के अधिकतम उपयोग पर बल देते हुए कहा कि तकनीक के माध्यम से सेवाओं को सरल, तेज और पारदर्शी बनाया जाए। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि आम जनता का सरकार पर भरोसा भी मजबूत होगा।
जनता केंद्र में हो
मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन का असली उद्देश्य जनता की सेवा है।
अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि हर निर्णय का केंद्र आम नागरिक हो। नियम लोगों के लिए हों, न कि लोग नियमों के लिए।
मुख्यमंत्री योगी के इस बड़े संकल्प को प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सोच ज़मीनी स्तर पर लागू होती है, तो उत्तर प्रदेश में विकास और निवेश की रफ्तार और तेज होगी।
निरुपमा पाण्डेय
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