धर्म-आस्था

UP: शंकराचार्य का तीखा तंज, बोले— जो लोग धर्म को बांट रहे वे कालनेमि, राक्षसों जैसा काम कर रहे कुछ संत

उत्तर प्रदेश में धर्म और समाज से जुड़े मुद्दों पर शंकराचार्य का बयान चर्चा का विषय बन गया है। शंकराचार्य ने धर्म के नाम पर विभाजन फैलाने वालों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जो लोग धर्म को बांटने का काम कर रहे हैं, वे कालनेमि जैसे हैं और राक्षसों जैसा आचरण कर रहे हैं। उन्होंने इशारों-इशारों में कुछ संतों पर भी सवाल खड़े किए, जो धार्मिक मंचों से समाज को जोड़ने के बजाय बांटने का काम कर रहे हैं।

क्या बोले शंकराचार्य

एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य ने कहा कि

धर्म का मूल उद्देश्य समाज को जोड़ना है, तोड़ना नहीं

जो लोग धर्म को नफरत और विभाजन का जरिया बना रहे हैं, वे सनातन परंपरा के विरोधी हैं

ऐसे लोग संत कहलाने योग्य नहीं हैं

उन्होंने कहा कि कालनेमि जैसे पात्र इतिहास में इसलिए जाने जाते हैं क्योंकि उन्होंने साधु का वेश धारण कर लोगों को भ्रमित किया। आज भी कुछ लोग वही काम दोहरा रहे हैं।

धर्म व्यापार नहीं है’

शंकराचार्य ने साफ शब्दों में कहा कि

धर्म कोई व्यापार नहीं

न ही सत्ता या प्रसिद्धि पाने का साधन

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तथाकथित संत

धर्म के नाम पर समाज को बांट रहे हैं

लोगों की भावनाओं से खेल रहे हैं

सनातन परंपरा की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं

उनका कहना था कि सच्चा संत वही है, जो सत्य, संयम और समरसता का मार्ग दिखाए।

समाज को बांटने पर चेतावनी

शंकराचार्य ने कहा कि

धर्म के नाम पर हिंसा या नफरत फैलाना अधर्म है

जो लोग ऐसा कर रहे हैं, वे समाज के लिए खतरा बनते जा रहे हैं

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे

धर्म के मूल ग्रंथों को समझें

भड़काऊ भाषणों से दूर रहें

विवेक से निर्णय लें

संत समाज पर भी उठे सवाल

इस बयान के बाद संत समाज में भी चर्चा तेज हो गई है। कई संतों और धार्मिक संगठनों ने शंकराचार्य की बातों को धर्म की मूल भावना से जुड़ा हुआ बताया है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि यह बयान उन संतों के लिए चेतावनी है, जो धार्मिक मंचों का राजनीतिक या व्यक्तिगत लाभ के लिए उपयोग कर रहे हैं।

राजनीतिक और सामाजिक हलचल

शंकराचार्य के इस बयान के बाद

राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं

सोशल मीडिया पर बयान को लेकर बहस छिड़ गई है

कुछ लोग इसे समाज को जोड़ने वाला संदेश बता रहे हैं, तो कुछ इसे मौजूदा हालात पर सीधा प्रहार मान रहे हैं।

शंकराचार्य का संदेश

अपने वक्तव्य के अंत में शंकराचार्य ने कहा कि

धर्म का रास्ता करुणा, सत्य और सहअस्तित्व का है

जो इस रास्ते से भटकाता है, वह संत नहीं हो सकता

उन्होंने अपील की कि धर्म को विभाजन नहीं, एकता का माध्यम बनाया जाए, तभी समाज और देश आगे बढ़ सकता है।

Poonam Report

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