मंदिर आंदोलन के संघर्ष के साथियों की तलाश में छूट रहे पसीने, 19 मार्च को राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित
मंदिर आंदोलन के दौरान संघर्ष करने वाले पुराने साथियों की पहचान और तलाश प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। वर्षों पहले आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले कई कार्यकर्ता आज अलग-अलग जगहों पर बस चुके हैं, कुछ का संपर्क टूट चुका है, तो कुछ के दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में 19 मार्च को होने वाले राष्ट्रपति सम्मान समारोह से पहले इन संघर्ष साथियों को चिन्हित करना मुश्किल साबित हो रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंदिर आंदोलन में योगदान देने वाले कार्यकर्ताओं को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जाना है, लेकिन सूची तैयार करने में कई अड़चनें सामने आ रही हैं। कई नाम ऐसे हैं, जिनका सिर्फ मौखिक उल्लेख रिकॉर्ड में है, जबकि पहचान और भूमिका से जुड़े प्रमाण अधूरे हैं। प्रशासनिक टीमें पुराने रिकॉर्ड, संगठन के दस्तावेज और स्थानीय स्तर की जानकारी खंगालने में जुटी हुई हैं।
आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ लोगों का कहना है कि उस दौर में कई कार्यकर्ताओं ने बिना किसी पद या पहचान की अपेक्षा किए संघर्ष किया, इसलिए आज उनका पता लगाना कठिन हो रहा है। कुछ साथी अब इस दुनिया में नहीं रहे, जबकि कुछ बीमारी या आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।
सम्मान समारोह को लेकर प्रशासन पर समय का दबाव भी है। अधिकारियों का कहना है कि कोशिश की जा रही है कि कोई भी वास्तविक संघर्ष साथी सम्मान से वंचित न रह जाए। इसके लिए स्थानीय संगठनों, संत-समाज और पुराने आंदोलनकारियों से सहयोग लिया जा रहा है।
उधर, आंदोलन से जुड़े लोगों में इस सम्मान को लेकर उत्साह भी है। उनका मानना है कि यह कार्यक्रम संघर्ष और बलिदान को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला ऐतिहासिक क्षण होगा। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 19 मार्च से पहले कितने संघर्ष साथियों को चिन्हित कर सम्मान सूची में शामिल किया जा पाता है।
Akshansh Report



