आरटीआई खारिज करने में सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट सबसे आगे, सीआईसी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) की ताजा रिपोर्ट में आरटीआई आवेदनों के निस्तारण को लेकर अहम आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सूचना का अधिकार (RTI) के तहत दायर आवेदनों को खारिज करने के मामलों में देश की शीर्ष अदालत Supreme Court of India और Delhi High Court अग्रणी संस्थानों में शामिल हैं।
सीआईसी रिपोर्ट में क्या कहा गया?
Central Information Commission (सीआईसी) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, कई आरटीआई आवेदन तकनीकी आधार, सूचना उपलब्ध न होने या न्यायिक कार्य से संबंधित छूट (एक्सेम्प्शन) के तहत अस्वीकृत किए गए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि न्यायालयों में दायर आरटीआई का बड़ा हिस्सा प्रशासनिक सूचनाओं से जुड़ा होता है, जबकि न्यायिक निर्णयों से संबंधित जानकारी अलग प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराई जाती है।
खारिज करने के कारण
रिपोर्ट में जिन प्रमुख कारणों का उल्लेख किया गया है, उनमें शामिल हैं:
सूचना का न्यायिक कार्यवाही से संबंधित होना
गोपनीय या संवेदनशील दस्तावेज
आरटीआई अधिनियम की धारा 8 के तहत छूट
मांगी गई सूचना का रिकॉर्ड में उपलब्ध न होना
पारदर्शिता पर बहस
रिपोर्ट सामने आने के बाद पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गोपनीयता बनाए रखना आवश्यक है, जबकि अन्य का मत है कि प्रशासनिक कार्यों में अधिक पारदर्शिता होनी चाहिए।
आगे की दिशा
सीआईसी ने सभी सार्वजनिक प्राधिकरणों को रिकॉर्ड प्रबंधन बेहतर करने और जहां संभव हो, सूचनाओं को स्वप्रकाशन (सुओ मोटू) के माध्यम से सार्वजनिक करने की सलाह दी है।
यह रिपोर्ट सूचना के अधिकार कानून के क्रियान्वयन और न्यायिक संस्थानों में पारदर्शिता की स्थिति पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है। Poonam Report



