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खबर का असर: जस्ट एक्शन अखबार में खुलासे के बाद प्रशासन सख्त

2 निलंबित, 3 की संविदा समाप्त, अधिकारियों पर कार्रवाई की संस्तुति

बहराइच, 20 फरवरी।
18 फरवरी 2026 को अखबार में प्रकाशित निःशुल्क पाठ्य-पुस्तकों को कबाड़ में बेचने की खबर के बाद प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लेते हुए बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी द्वारा गठित 5 सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आधा दर्जन से अधिक कर्मचारियों के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाए गए हैं।
जांच आख्या में स्पष्ट हुआ कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 हेतु प्राप्त पुस्तकों के भंडारण और अभिलेख रख-रखाव में गंभीर अनियमितता और शिथिलता बरती गई। सत्यापन समिति को मुद्रकों से प्राप्त पुस्तकों की संख्या का इनवॉइस से मिलान करना था, लेकिन जिम्मेदारों ने अपने दायित्वों का सही निर्वहन नहीं किया, जिसके कारण भंडारण स्थल पर पुस्तकें उपलब्ध नहीं मिलीं।
ये हुई प्रमुख कार्रवाई
भंडारण के जिम्मेदार अनुचर आलोक कुमार और शफीक अहमद निलंबित
अनुदेशक अतुल कुमार सिंह, जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता आशुतोष सिंह और स्पेशल एजुकेटर दीपक कुमार की संविदा समाप्त
प्रभारी सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी वीरेश कुमार वर्मा, खंड शिक्षा अधिकारी नगर क्षेत्र डाली मिश्रा और खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय रंजीत कुमार के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति
ऐसे खुला मामला
16 फरवरी की रात जिलाधिकारी को सूचना मिली कि ट्रक संख्या UP-21 FT-8485 शैक्षणिक सत्र की निःशुल्क किताबें कबाड़ में बेचने के लिए काशीपुर ले जाई जा रही हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मुख्य विकास अधिकारी को कार्रवाई के निर्देश दिए गए। पुलिस की मदद से ट्रक को लखीमपुर से वापस लाकर थाना रामगांव में सुरक्षित कराया गया।
इसके बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा पुस्तकों को सरकारी बताते हुए मुकदमा दर्ज कराया गया और जिलाधिकारी ने 2 दिन में सत्यापन रिपोर्ट देने के निर्देश के साथ समिति गठित की। रिपोर्ट मिलते ही तीसरे दिन कार्रवाई शुरू कर दी गई।

प्रशासन का रुख

जिलाधिकारी ने अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन को जांच रिपोर्ट भेजते हुए संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग या लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी।
उल्लेखनीय: यह पूरी कार्रवाई 18 फरवरी को जस्ट एक्शन अखबार में खबर प्रकाशित होने के बाद तेज हुई, जिससे प्रशासनिक तंत्र में सक्रियता आई और जिम्मेदारों पर त्वरित कार्रवाई संभव हो सकी।

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