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किस्सा: जब लंदन में सावरकर ने गांधी को खाने पर बुलाया, लेकिन उन्हें भूखा रहना पड़ा

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौर की एक रोचक घटना अक्सर चर्चा में रहती है। यह किस्सा उस समय का है जब Vinayak Damodar Savarkar और Mahatma Gandhi दोनों लंदन में थे।

लंदन का दौर और मुलाकात

20वीं सदी की शुरुआत में कई भारतीय क्रांतिकारी और नेता पढ़ाई या राजनीतिक गतिविधियों के सिलसिले में लंदन में रह रहे थे। सावरकर वहां इंडिया हाउस से जुड़े थे और क्रांतिकारी विचारधारा के प्रमुख चेहरों में गिने जाते थे।

इसी दौरान गांधी भी दक्षिण अफ्रीका से जुड़े मामलों और पढ़ाई के सिलसिले में लंदन आते-जाते रहे। एक बार सावरकर ने गांधी को भोजन पर आमंत्रित किया।

भोजन को लेकर मतभेद

कहा जाता है कि सावरकर मांसाहारी भोजन के समर्थक थे और उन्होंने अपने मेहमानों के लिए नॉनवेज व्यंजन तैयार करवाए। वहीं गांधी सख्त शाकाहारी थे और अपने सिद्धांतों को लेकर बेहद अनुशासित माने जाते थे।

जब गांधी को पता चला कि भोजन में मांसाहारी व्यंजन हैं, तो उन्होंने उसे खाने से इनकार कर दिया। इस पर वहां मौजूद कुछ लोगों ने हल्का-फुल्का मजाक भी किया। बताया जाता है कि गांधी ने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और उस दिन लगभग भूखे ही लौटना पड़ा।

विचारधाराओं का अंतर

यह घटना केवल भोजन का प्रसंग नहीं थी, बल्कि दोनों नेताओं की अलग-अलग जीवनशैली और विचारधाराओं को भी दर्शाती है।

सावरकर क्रांतिकारी और उग्र राष्ट्रवादी विचारों के लिए जाने जाते थे।

गांधी अहिंसा, सादगी और आत्मसंयम के प्रतीक माने जाते हैं।

दोनों ही स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण चेहरे थे, लेकिन उनके रास्ते और सोच में स्पष्ट अंतर था।

एक ऐतिहासिक प्रसंग

इतिहासकारों के अनुसार, यह किस्सा उस दौर की बहसों और मतभेदों का प्रतीक है। हालांकि समय के साथ यह कहानी अलग-अलग रूपों में सुनाई जाती रही है, लेकिन इसका मूल संदेश यही है कि गांधी अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे।

यह घटना आज भी चर्चा में रहती है और उस दौर के राजनीतिक एवं व्यक्तिगत मतभेदों की झलक पेश करती है।

(Poonam Report)

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