नई दिल्ली। भारत और घाना के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक, दवा निर्माण और विकास सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की घाना यात्रा के दौरान दोनों देशों ने व्यापक साझेदारी को नए क्षेत्रों तक ले जाने पर जोर दिया।
जयशंकर ने घाना के विदेश मंत्री सैम ओकुडजेटो अबलाक्वा के साथ व्यापक बातचीत की। इसमें व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ विकास सहयोग, फार्मास्यूटिकल्स, क्षमता निर्माण, रक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। दोनों देशों ने लोगों के बीच संपर्क और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की।
घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा के साथ बैठक में भी भारत-घाना आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसमें व्यापार, निवेश, रेलवे विकास और फार्मास्युटिकल विनिर्माण जैसे क्षेत्र शामिल रहे। घाना की ओर से स्थानीय स्तर पर दवाओं और वैक्सीन के उत्पादन के लिए साझेदारी की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया।
भारत और घाना के बीच व्यापारिक संबंध पहले से महत्वपूर्ण हैं। घाना से भारत को सोना, कोको, काजू और लकड़ी जैसे उत्पाद मिलते हैं, जबकि भारत से घाना को दवाएं, कृषि मशीनरी, वाहन, विद्युत उपकरण, प्लास्टिक, लोहा-इस्पात और अन्य उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार करीब 3.14 अरब डॉलर रहा।
रक्षा और तकनीकी सहयोग भी भारत की अफ्रीका नीति में महत्वपूर्ण क्षेत्र बनते जा रहे हैं। भारत अपने रक्षा उत्पादन और तकनीकी क्षमताओं को बढ़ा रहा है तथा कई देशों के साथ रक्षा सहयोग, क्षमता निर्माण और तकनीकी साझेदारी को आगे बढ़ा रहा है। इससे अफ्रीकी देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को भी नए अवसर मिल सकते हैं।
जयशंकर की घाना यात्रा तीन देशों की अफ्रीका यात्रा का पहला चरण है। इसके बाद वह कोट द’आइवोआर और इथियोपिया जाएंगे। इस यात्रा का उद्देश्य अफ्रीकी देशों के साथ व्यापार, निवेश, विकास सहयोग और राजनीतिक संबंधों को मजबूत करना है।
भारत की अफ्रीका नीति में व्यापार के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, तकनीक, कृषि, बुनियादी ढांचे और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों को भी महत्व दिया जा रहा है। घाना के साथ साझेदारी में दवा निर्माण, कृषि, डिजिटल तकनीक और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की संभावना है। इससे भारत और अफ्रीकी देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को नए आर्थिक और रणनीतिक क्षेत्रों तक विस्तार मिल सकता है।
Poonam Report.



