जापानी तकनीक का कमाल, इंदौर के कॉलेज ने दो साल में बना दिया जंगल

इंदौर के एक कॉलेज ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अनोखी पहल करते हुए जापानी तकनीक से महज दो साल में घना जंगल तैयार कर दिया। इस पहल को क्षेत्र में हरित क्रांति की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
कौन सी है जापानी तकनीक?
यह परियोजना प्रसिद्ध वनस्पति वैज्ञानिक Akira Miyawaki द्वारा विकसित मियावाकी पद्धति पर आधारित है। इस तकनीक में देशज (स्थानीय) प्रजातियों के पौधों को बेहद सघन रूप से लगाया जाता है, जिससे कम समय में तेजी से बढ़ने वाला घना जंगल तैयार होता है।
कैसे बना दो साल में जंगल?
पहले मिट्टी की गुणवत्ता का परीक्षण किया गया।
जैविक खाद और पोषक तत्व मिलाकर मिट्टी को तैयार किया गया।
स्थानीय प्रजातियों के सैकड़ों पौधे बेहद कम दूरी पर रोपे गए।
शुरुआती एक-दो वर्षों तक नियमित सिंचाई और देखरेख की गई।
इस पद्धति में पौधे आपसी प्रतिस्पर्धा के कारण तेजी से बढ़ते हैं और प्राकृतिक जंगल जैसा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करते हैं
कम समय में घना हरित क्षेत्र
वायु प्रदूषण में कमी
पक्षियों और छोटे जीवों के लिए आवास
तापमान नियंत्रण में मदद
कार्बन अवशोषण क्षमता में वृद्धि
पर्यावरण के लिए प्रेरक कदम
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य छात्रों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और शहर में हरित क्षेत्र का विस्तार करना है। स्थानीय लोगों ने भी इस प्रयास की सराहना की है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि शहरी क्षेत्रों में मियावाकी तकनीक से विकसित ऐसे माइक्रो-फॉरेस्ट भविष्य में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। Poonam Report



