दिल्ली में पढ़ाई करने आने वाले छात्रों के लिए कॉलेज के आसपास रहने की जगह मिलना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। हॉस्टलों में सीमित सीटों और लगातार बढ़ती मांग के बीच बड़ी संख्या में छात्र PG और किराये के कमरों पर निर्भर हैं। इसी मजबूरी के बीच कई इलाकों में ऊंचे किराये, छोटे कमरों, भीड़भाड़ और सुरक्षा से जुड़ी शिकायतें सामने आ रही हैं।
सत्य निकेतन में PG इमारत गिरने की घटना के बाद इन सवालों पर चर्चा और तेज हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ इलाकों में एक बेड के लिए ₹12,000 से ₹20,000 तक किराया लिया जा रहा है, जबकि बेहतर सुविधाओं के नाम पर यह रकम ₹25,000 से ₹30,000 तक पहुंच सकती है। कई कमरों में दो-तीन बेड लगाकर अलग-अलग छात्रों से किराया लेने की व्यवस्था भी बताई गई है।
नॉन-एसी कमरों के लिए करीब ₹10,000 से ₹15,000 और एसी कमरों के लिए ₹15,000 से ₹20,000 तक किराये की जानकारी सामने आई है। Wi-Fi, जिम, सिक्योरिटी गार्ड और दूसरी सुविधाओं के नाम पर किराया और बढ़ जाता है। ऐसे में छात्रों और उनके परिवारों का सवाल है कि महंगा किराया देने के बावजूद भवन की मजबूती और आपातकालीन सुरक्षा की गारंटी कैसे सुनिश्चित होगी।
दिल्ली विश्वविद्यालय के आसपास PG तलाशने वाले अभिभावकों ने भी छोटे कमरों, स्वच्छता, पुराने भवनों और रखरखाव की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। कुछ मामलों में ₹14,000 से ₹18,000 तक मासिक किराये की मांग की गई, जबकि बेहतर सुविधाओं वाली जगह के लिए परिवारों को इससे काफी अधिक खर्च करना पड़ सकता है।
अब सरकार भी PG व्यवस्था को लेकर नियम सख्त करने की तैयारी में है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत PG को लाइसेंस, पुलिस मंजूरी और संरचनात्मक तथा अग्नि-सुरक्षा संबंधी प्रमाणन की जरूरत हो सकती है। प्रत्येक PG को पंजीकरण संख्या देने और उसे एक सार्वजनिक पोर्टल पर सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव भी सामने आया है।
प्रस्तावित नीति में किराये में पारदर्शिता, सुरक्षा जांच और शिकायतों के समाधान पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार ने छात्र क्षेत्रों में भवनों के संरचनात्मक ऑडिट कराने की दिशा में कदम उठाने की बात कही है। इससे छात्रों और अभिभावकों को PG चुनने से पहले भवन की सुरक्षा और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली में पढ़ाई के लिए आने वाले छात्रों के लिए सुरक्षित और किफायती आवास केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और शिक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। सत्य निकेतन की घटना के बाद सामने आई चिंताओं ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि PG संचालकों से किराया वसूलने के साथ-साथ सुरक्षा मानकों और मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
Poonam Report



