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“न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को बड़ा झटका

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका, संसदीय जांच समिति के गठन को दी थी

जस्ट एक्शन न्यूज :
निरुपमा पाण्डेय :

दिल्ली, 16 जनवरी 2026 —
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की याचिका को आज खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने संसद द्वारा गठित संसदीय जांच समिति के गठन को चुनौती दी थी। इस फैसले से न्यायमूर्ति वर्मा को बड़ा झटका लगा है और महाभियोग जांच प्रक्रिया अब आगे बढ़ेगी।

क्या था मामला?

न्यायमूर्ति वर्मा के सरकारी आवास से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने के आरोपों के बाद संसद में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया गया। इसके आधार पर लोकसभा अध्यक्ष ने जजेज (जांच) एक्ट, 1968 के तहत एक तीन सदस्यीय संसदीय जांच समिति का गठन किया।

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती:

न्यायमूर्ति वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में दावा किया कि समिति का गठन कानूनी प्रक्रिया के विरुद्ध है और बिना दोनों सदनों (लोकसभा व राज्यसभा) की स्वीकृति के ऐसा किया गया है, जो कानून के तहत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि धारा 3(2) के तहत पूर्व में दोनों सदनों में पेश महाभियोग प्रस्ताव के बाद ही समिति का गठन होना चाहिए था।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
:
दो न्यायाधीशीय पीठ — न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एस. सी. शर्मा — ने वर्मा की याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने कोई अनियमितता नहीं की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि समिति का गठन संविधान और Judges (Inquiry) Act के अनुरूप हुआ है और इसमें कोई विधिक त्रुटि नहीं पाई गई। कोर्ट ने कहा कि याचिका में दी गई दलीलों के आधार पर कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

प्रक्रिया आगे बढ़ेगी
:
याचिका खारिज होने के बाद संसदीय जांच समिति अपनी कार्यवाही जारी रखेगी। इसका मकसद न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ महाभियोग संबंधी आरोपों की गहन जांच करना है।

विशेष टिप्पणी:

यह मामला भारतीय न्यायपालिका और संसद के बीच जजों के जवाबदेही तंत्र और संवैधानिक प्रक्रिया पर एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने स्पष्ट किया है कि जांच प्रक्रिया कानून के अनुसार ही हो रही है और अदालत इसमें फिलहाल हस्तक्षेप नहीं करेगी।

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