
बिहार की राजनीति में जमुई विधानसभा सीट इस बार फिर सुर्खियों में है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मौजूदा विधायक श्रेयसी सिंह एक बार फिर मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। 2020 में उन्होंने इस सीट पर शानदार जीत हासिल कर विपक्ष को कड़ी टक्कर दी थी। लेकिन 2025 का चुनाव समीकरण पूरी तरह बदलता दिख रहा है, क्योंकि इस बार M-Y यानी मुस्लिम-यादव फैक्टर फिर से सक्रिय हो चुका है।
🔹 राजनीतिक समीकरण
जमुई क्षेत्र में यादव और मुस्लिम मतदाता मिलकर लगभग 45% वोट बैंक रखते हैं। महागठबंधन इस समीकरण को भुनाने की रणनीति में जुटा है। दूसरी ओर, भाजपा श्रेयसी सिंह के व्यक्तिगत करिश्मे, केंद्रीय नेतृत्व की लोकप्रियता और विकास कार्यों को चुनावी मुद्दा बना रही है।
🔹 श्रेयसी सिंह का अब तक का प्रदर्शन
राइफल शूटिंग में भारत का नाम रोशन करने वाली श्रेयसी सिंह राजनीति में भी सटीक निशाना लगाती नजर आईं। 2020 में उन्होंने जनता दल (यू) और आरजेडी दोनों के गठजोड़ को चुनौती देते हुए जीत हासिल की थी।
उनकी साफ-सुथरी छवि और खेल पृष्ठभूमि ने युवाओं और महिलाओं के बीच मजबूत आधार बनाया है।
🔹 विपक्ष की रणनीति
महागठबंधन की ओर से इस बार RJD किसी प्रभावशाली यादव चेहरे को टिकट देने की योजना बना रही है। साथ ही AIMIM और कांग्रेस के बीच भी तालमेल की चर्चा है ताकि अल्पसंख्यक वोटों का बिखराव न हो।
🔹 स्थानीय मुद्दे
रोजगार और उद्योगों का अभाव
सड़क और शिक्षा सुविधाओं की कमी
जलसंकट और बिजली की समस्या
इन स्थानीय मुद्दों पर जनता का मूड अभी तय नहीं है। BJP को अपने विकास कार्यों को सही ढंग से जनता तक पहुँचाना होगा, वरना M-Y फैक्टर भारी पड़ सकता है।
🔹 निष्कर्ष
2025 का चुनाव जमुई में श्रेयसी सिंह बनाम महागठबंधन का गणित साबित होगा। अगर श्रेयसी अपनी लोकप्रियता और भाजपा संगठन की मजबूती को भुना पाती हैं, तो वह एक बार फिर “सही निशाना” लगा सकती हैं। लेकिन M-Y फैक्टर और एंटी-इंकम्बेंसी इस बार उनके लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं।
📍देखना दिलचस्प होगा कि जमुई की जनता किसे मौका देती है – विकास की राजनीति को या जातीय समीकरणों को।



