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सत्ता के लिए भाई ने भाई को दिया धोखा! उद्धव के दुश्मन संग राज ने मिलाया हाथ,

UBT नाराज़—क्या टूटेगा ठाकरे परिवार का भाईचारा?

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मुंबई।
महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। ठाकरे परिवार के भीतर राजनीतिक रिश्तों को लेकर उठे नए घटनाक्रम ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। आरोप लग रहे हैं कि सत्ता की राजनीति में राज ठाकरे ने ऐसे राजनीतिक खेमे के साथ हाथ मिलाने के संकेत दिए हैं, जिसे उद्धव ठाकरे अपना राजनीतिक विरोधी मानते हैं। इस घटनाक्रम से शिवसेना (UBT) खेमे में नाराज़गी खुलकर सामने आ रही है और सवाल उठने लगे हैं—क्या ठाकरे परिवार का भाईचारा एक बार फिर दरकने वाला है?
क्या है पूरा मामला?

हालिया राजनीतिक बैठकों और बयानों के बाद यह चर्चा तेज है कि मनसे प्रमुख राज ठाकरे सत्तारूढ़ खेमे के साथ समीकरण साधने की कोशिश में हैं। माना जा रहा है कि यह वही खेमा है, जिसने 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद उद्धव ठाकरे की सत्ता छीन ली थी। ऐसे में राज ठाकरे का संभावित कदम उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
UBT की नाराज़गी

शिवसेना (UBT) के नेताओं का कहना है कि यह कदम न केवल वैचारिक तौर पर विरोधाभासी है, बल्कि ठाकरे परिवार की साझा राजनीतिक विरासत के भी खिलाफ है। पार्टी के अंदरखाने में इस बात को लेकर तीखी प्रतिक्रिया है कि सत्ता की राजनीति में पारिवारिक और वैचारिक प्रतिबद्धताओं की अनदेखी की जा रही है।
पहले भी रहे हैं मतभेद

यह पहली बार नहीं है जब उद्धव और राज ठाकरे के रिश्तों में तल्खी दिखी हो। अलग-अलग राजनीतिक रास्तों पर चलने के बावजूद समय-समय पर दोनों के बीच मेल-मिलाप की अटकलें लगती रही हैं, लेकिन हर बार सियासी समीकरण आड़े आते रहे। अब ताज़ा घटनाक्रम ने पुराने जख्म फिर हरे कर दिए हैं।
सियासी समीकरणों पर असर

विश्लेषकों का मानना है कि यदि राज ठाकरे औपचारिक रूप से सत्ता पक्ष के साथ कदम बढ़ाते हैं, तो इसका असर मुंबई-महाराष्ट्र की राजनीति पर व्यापक पड़ेगा। एक ओर यह विपक्षी एकता को कमजोर कर सकता है, तो दूसरी ओर मराठी वोट बैंक के ध्रुवीकरण की नई पटकथा लिखी जा सकती है।
आगे क्या?
फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से औपचारिक घोषणा का इंतजार है। लेकिन बयानबाज़ी और राजनीतिक गतिविधियों ने संकेत दे दिए हैं कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर संभव है। सवाल यही है—क्या सत्ता की राजनीति में ठाकरे परिवार का भाईचारा टूटेगा, या आख़िरी वक्त पर कोई सुलह की राह निकलेगी?
— निरुपमा पाण्डेय
जस्ट एक्शन न्यूज

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