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वह शख्स, जिसके चलते होने जा रहा भारत–पाकिस्तान मैच

पर्दे के पीछे कैसे हुआ बड़ा खेल, जानिए पूरी कहानी

Report: Nirupam pandey:
:Just action news:

नई दिल्ली।

भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर क्रिकेट मैदान पर टक्कर तय मानी जा रही है। राजनीतिक तनाव, सुरक्षा चिंताओं और द्विपक्षीय रिश्तों की तल्खी के बावजूद यह हाई-वोल्टेज मुकाबला कैसे संभव हुआ—इसके पीछे एक अहम भूमिका निभाने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रशासन से जुड़े शख्स की चर्चा तेज़ हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, यह मुकाबला किसी द्विपक्षीय सीरीज़ का हिस्सा नहीं, बल्कि आईसीसी टूर्नामेंट और मल्टी-नेशन इवेंट्स के तहत कराया जा रहा है। नियमों के मुताबिक, आईसीसी आयोजनों में भारत और पाकिस्तान दोनों को हिस्सा लेना होता है और ऐसे में दोनों टीमों का आमना-सामना तय हो जाता है।
पर्दे के पीछे की रणनीति
क्रिकेट से जुड़े जानकार बताते हैं कि आईसीसी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी, जिनका संबंध क्रिकेट प्रशासन और वैश्विक स्पॉन्सरशिप नेटवर्क से है, ने इस मुकाबले को लेकर अहम समन्वय किया।
प्रसारण अधिकारों से होने वाली भारी कमाई
ग्लोबल व्यूअरशिप में जबरदस्त उछाल
स्पॉन्सर्स और विज्ञापनदाताओं का दबाव
इन सभी वजहों से भारत–पाकिस्तान मैच को टूर्नामेंट शेड्यूल में शामिल किया गया।
BCCI और PCB की भूमिका
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह द्विपक्षीय सीरीज़ नहीं खेलेगा, लेकिन आईसीसी इवेंट्स में भारत की भागीदारी नियमों के तहत होती है।
वहीं पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) भी इस मुकाबले को राजस्व और वैश्विक पहचान के लिहाज़ से बेहद अहम मानता है।
सुरक्षा और राजनीति से अलग रखा गया क्रिकेट
आधिकारिक तौर पर यह फैसला पूरी तरह क्रिकेट और व्यावसायिक हितों के आधार पर लिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों की हरी झंडी और मेज़बान देश की व्यवस्था के बाद ही मुकाबले को मंज़ूरी दी गई है।
करोड़ों की कमाई का खेल
एक अनुमान के मुताबिक, भारत–पाकिस्तान का एक मुकाबला
प्रसारण से हज़ारों करोड़ की कमाई
विज्ञापन दरों में कई गुना उछाल
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिकॉर्ड व्यूअरशिप
लेकर आता है, यही वजह है कि आईसीसी ऐसे मुकाबलों को किसी भी कीमत पर शेड्यूल में रखना चाहता है।
निष्कर्ष
भारत–पाकिस्तान मैच भावनाओं से ज़्यादा नियमों, वैश्विक क्रिकेट राजनीति और पैसों के समीकरण से तय होता है। पर्दे के पीछे काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रशासन से जुड़े चेहरों की भूमिका अहम होती है, जबकि मैदान पर फैसला खिलाड़ियों के बल्ले और गेंद से ही होगा।

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