हरियाली तीज 2025: शिव-पार्वती की यह कथा सुने बिना अधूरा है तीज का व्रत, जानें पूजा का महत्व और पौराणिक प्रसंग

बहुत समय पहले की बात है। हिमालय पर्वत की पुत्री देवी पार्वती, बचपन से ही भगवान शिव को अपना पति मान बैठी थीं। लेकिन यह कोई सामान्य इच्छा नहीं थी — यह था उनका संकल्प, उनका प्रेम, और उनकी आत्मा की पुकार।
💫 अटल संकल्प की शुरुआत
जब वह थोड़ी बड़ी हुईं, तो उन्होंने तपस्या का निश्चय किया। उन्होंने ठान लिया कि जब तक शिव उन्हें स्वीकार नहीं करेंगे, वे संसार की किसी भी सुख-सुविधा को ग्रहण नहीं करेंगी। उन्होंने हिमालय की ऊँचाइयों पर जाकर वर्षों तक कठोर तप किया — ना अन्न, ना जल। सिर्फ सूखे पत्तों को खाकर उन्होंने 12 वर्षों तक शिव की साधना की।
🌧️ निष्ठा की परीक्षा
इधर, उनके पिता पर्वतराज हिमालय को चिंता सताने लगी। उन्होंने सोचा कि उनकी बेटी के लिए भगवान विष्णु से अच्छा वर कौन हो सकता है। जब नारद मुनि ने उन्हें बताया कि विष्णु जी विवाह हेतु इच्छुक हैं, तो पर्वतराज ने तुरंत सहमति दे दी।लेकिन जैसे ही यह बात पार्वती जी को पता चली, उनका दिल टूट गया। उन्होंने रोते हुए अपनी सखी से कहा, “मैंने तो स्वयं को शिव को समर्पित कर दिया है। अब किसी और से विवाह असंभव है।सखी ने उन्हें सुझाव दिया, “चलिए, एक घने वन में चलें। वहां आप छिपकर अपनी साधना और तीव्र करें। भगवान शिव अवश्य प्रसन्न होंगे।”
🕉️ शिवलिंग की रचना और तृतीया व्रत
पार्वती जी एक वन की गुफा में चली गईं। वहाँ उन्होंने रेत से शिवलिंग बनाकर पूजा आरंभ की और श्रावण शुक्ल तृतीया को विशेष व्रत रखा। उन्होंने पूरी श्रद्धा से भगवान शिव का आह्वान किया।
उनकी अटल भक्ति और प्रेम से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और कहा:
> “हे पार्वती, तुम्हारी भक्ति और तप ने मुझे बाध्य कर दिया। आज से तुम मेरी अर्धांगिनी हो। यह तीज व्रत साक्षी रहेगा तुम्हारे प्रेम और शक्ति का।”
👰 विवाह और व्रत की परंपरा
इसके बाद पर्वतराज को भी पार्वती की इच्छाओं का मान रखना पड़ा। विधिपूर्वक भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ — एक दिव्य मिलन, जो आज भी समर्पण और प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
🔱 शिव का वरदान
शिवजी ने कहा:
> “जो भी स्त्री इस व्रत को श्रद्धा, प्रेम और नियमपूर्वक करेगी, उसे तुम्हारे जैसा अचल सौभाग्य और अखंड सुहाग प्राप्त होगा।”
🌿 इसलिए हरियाली तीज है विशेष
यह केवल एक व्रत नहीं, बल्कि नारी शक्ति, प्रेम और संकल्प की विजयगाथा है।हरियाली तीज पर महिलाएं सोलह श्रृंगार, भक्ति, व्रत और कथा के माध्यम से इस प्रेम को स्मरण करती हैं।
📖 संक्षेप में संदेश:
हरियाली तीज की कथा हमें सिखाती है कि —
- सच्चा प्रेम कभी हारता नहीं
- संकल्प में शक्ति होती है
- और भक्ति से भगवान भी झुकते हैं।



