कुत्तों को ज़हर का इंजेक्शन देकर मारना हैवानियत, कानून और इंसानियत दोनों के खिलाफ

आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रण के नाम पर उन्हें ज़हर का इंजेक्शन देकर मारना न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि पूरी तरह गैरकानूनी भी है। पशु अधिकार संगठनों और पशु प्रेमियों ने ऐसे मामलों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे खुली हैवानियत करार दिया है। उनका कहना है कि समस्या का समाधान हत्या नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और मानवीय उपाय हैं।
कानून क्या कहता है?
भारत में Animal Birth Control (ABC) Rules और Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 के तहत किसी भी कुत्ते को ज़हर देकर या क्रूर तरीके से मारना अपराध है। नियमों के अनुसार आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने के लिए नसबंदी (स्टरलाइजेशन) और टीकाकरण ही वैध तरीका है। नियम तोड़ने पर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
पशु चिकित्सकों की चेतावनी
विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों का कहना है कि ज़हर का इंजेक्शन भयानक पीड़ा देता है और कई बार कुत्ता घंटों तड़पता रहता है। यह तरीका न तो सुरक्षित है, न नैतिक। इसके उलट, नसबंदी कार्यक्रम से आक्रामकता कम होती है, बीमारियां नियंत्रित होती हैं और मानव-पशु संघर्ष घटता है।
सामाजिक जिम्मेदारी और प्रशासन की भूमिका
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों में शून्य सहनशीलता नीति अपनाई जाए। दोषी व्यक्तियों या एजेंसियों पर एफआईआर दर्ज हो, साथ ही नगर निकायों को ABC प्रोग्राम को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए जाएं।
समाधान क्या है?
नगर निकायों द्वारा नियमित नसबंदी व एंटी-रेबीज टीकाकरण
पशु चिकित्सालयों और NGO के साथ समन्वय
नागरिकों के लिए जागरूकता अभियान
क्रूरता के मामलों में त्वरित कानूनी कार्रवाई
समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने सबसे कमजोर जीवों के साथ कैसा व्यवहार करता है। कुत्तों को ज़हर देकर मारना किसी समस्या का हल नहीं, बल्कि सभ्यता पर धब्बा है। अब समय है कि कानून का पालन हो और इंसानियत जीतें।
Poonam Report



