
Report: Nirupam pandey:
: Just action news:
वाशिंगटन, अमेरिका:
वैश्विक तकनीक, रीन्यूएबल एनर्जी और नेशनल सिक्योरिटी के लिए अनिवार्य रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs) को लेकर अमेरिका ने एक ऐसा वैज्ञानिक और वाणिज्यिक कदम उठाया है जो दुनिया के आपूर्ति श्रृंखला के नक्शे को बदल सकता है।
नए शोध और उद्योग प्रयासों से पता चला है कि अमेरिका के भीतर ही जमीन में छिपा है लगभग $100 अरब (लगभग ₹8,000 अरब से अधिक) से भी ज्यादा मूल्य के रेयर अर्थ तत्व — और इसे निकालने के तरीके पर शोध तेजी से आगे बढ़ रहा है।
छिपा हुआ खजाना — कोयला राख में बसा REEs
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने पाया है कि पारंपरिक खनन से अलग, कोयले को जलाने के बाद बची राख (coal ash) में ही भारी मात्रा में मूल्यवान रेयर अर्थ एलिमेंट्स मौजूद हैं। शोध के अनुसार, ऐसे REEs जो आम तौर पर अलग से खनन में मुश्किल से निकलते हैं, वहीँ कोयला राख में पहले से जमा होकर “छुपे खजाने” की तरह मौजूद हैं।
इस खोज का मतलब है कि अमेरिका को अब विदेशी स्रोतों जैसे चीन पर कम निर्भर होना पड़ सकता है, क्योंकि यह एक घरेलू स्रोत हो सकता है जिसे पारंपरिक खनन की तुलना में कम पर्यावरणीय प्रभाव और कम लागत में निकाला जा सकता है।
नया तरीका: कोयला राख से REEs निकालने की तकनीक
वैज्ञानिक इस कचरे से REEs को अलग करने के तरीकों को परख रहे हैं। यह प्रक्रिया पारंपरिक खनन से अलग हटकर:
पहले से निकले हुए कचरे से खनिज निकालना,
भारी मशीनों से खुदाई का बोझ घटाना,
पर्यावरण पर कम विपरीत प्रभाव डालना,
और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की घरेलू आपूर्ति सशक्त करना
जैसे फायदे दे सकती है।
इस खोज की खास बात यह है कि पहले से मौजूद कोयले की राख, जो पर्यावरणीय समस्या मानी जाती थी, अब एक सोचा-समझा खनिज खजाना बन सकती है।
अमेरिका की रणनीति: चीन के दबदबे को तोड़ना
यह प्रयास सिर्फ एक वैज्ञानिक खोज नहीं है — यह राजनीतिक और आर्थिक रणनीति है। अमेरिका दशकों से रेयर अर्थ तत्वों के लिए चीन पर निर्भर रहा है, क्योंकि चीन विश्व की सबसे बड़ी आपूर्ति करने वाली शक्ति है।
अब अमेरिका:
✅ घरेलू स्रोतों को विकसित कर रहा है।
✅ REEs की रीफाइनिंग और प्रसंस्करण में निवेश बढ़ा रहा है।
✅ और आयात पर निर्भरता को कम करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है।
अमेरिका सरकार ने भी बड़े निवेश के साथ क़दम उठाए हैं, जिससे रेयर अर्थ सप्लाई चेन को मजबूत किया जा रहा है और चीन के प्रभाव को चुनौती दी जा रही है।
प्रभाव और संभावनाएँ
इस खोज और नई तकनीकों से:
🔹 अमेरिका की ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, स्मार्ट तकनीक, और EV (इलेक्ट्रिक वाहन) उद्योग को नई राहत मिल सकती है।
🔹 विदेशी खनिज आयात पर खर्च कम होगा।
🔹 वैश्विक बाजार में अमेरिका अपनी पकड़ मजबूत कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक तकनीकी और आर्थिक क्रांति की शुरुआत हो सकती है, जो REEs को एक बार फिर से वैश्विक रणनीतिक संसाधन के रूप में स्थापित करेगी।
निष्कर्ष:
अमेरिका में REEs को तलाशने और निकालने का “खज़ाना” अब वैज्ञानिक शोध और नई तकनीकों से सामने आ रहा है, जो चीन की एकतरफा सप्लाई पर वैश्विक दबदबे को चुनौती देगा, और नई आर्थिक-रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का द्वार खोलेगा।



