नोएडा भूमि मामले में PCS अधिकारी हरीश चंद्र सेवा से बर्खास्त, करीब 4000 करोड़ की जमीन से जुड़ा है मामला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वरिष्ठ PCS अधिकारी हरीश चंद्र को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई नोएडा में भूमि के लीजबैक से जुड़े मामले में विभागीय जांच के बाद की गई है। हरीश चंद्र वर्तमान में पश्चिम बंगाल के कोलकाता में खाद्य एवं रसद विभाग में स्थानीय प्रतिनिधि के पद पर तैनात थे। बर्खास्तगी का आदेश नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज ने जारी किया।
मामला नोएडा विकास प्राधिकरण में हरीश चंद्र की तैनाती के दौरान शाहदरा गांव की जमीन से जुड़ा है। विभागीय जांच में करीब 4,00,447 वर्ग मीटर जमीन के लीजबैक में गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया। जांच के अनुसार संबंधित जमीन की अनुमानित कीमत करीब 4,000 करोड़ रुपये बताई गई।
जांच रिपोर्ट में आरोप है कि जमीन और गांव की आबादी से संबंधित सर्वे में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को दर्ज नहीं किया गया। रिपोर्ट के अनुसार मूल काश्तकार का नाम संबंधित कॉलम में दर्ज नहीं था और नियमितीकरण समिति के सामने रखे जाने वाले जमीन के क्षेत्रफल की जानकारी भी पूरी तरह दर्ज नहीं की गई थी।
जांच में यह भी कहा गया कि लीजबैक से संबंधित समिति के सामने भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसके आधार पर शाहदरा गांव से बाहर के व्यक्तियों और निजी कंपनियों के पक्ष में जमीन आवंटित किए जाने का मामला सामने आया। विभागीय जांच में हरीश चंद्र को इन अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार माना गया।
इस मामले में राज्य सरकार ने 2013 में विभागीय कार्रवाई शुरू की थी। जांच मेरठ के तत्कालीन मंडलायुक्त को सौंपी गई थी। बाद में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, प्रयागराज से भी कार्रवाई के संबंध में सहमति प्राप्त की गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के 3 सितंबर 2026 के आदेश में सामने आए तथ्यों को भी अंतिम कार्रवाई में शामिल किया गया।
सरकार के बर्खास्तगी आदेश के बाद हरीश चंद्र के खिलाफ चल रही विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही को समाप्त करने की मंजूरी भी दी गई है।
Poonam Report.



