
हर चुनाव में सुबह 9 बजे, 11 बजे, 1 बजे और फिर शाम तक वोटिंग प्रतिशत की अपडेट आती रहती है। लोग अक्सर सोचते हैं — जब EVM मशीनें इंटरनेट से जुड़ी नहीं होतीं, तो आखिर चुनाव आयोग को यह डेटा कैसे और कहां से मिलता है? क्या मशीनें किसी नेटवर्क से जुड़ी होती हैं?
इस सवाल का जवाब खुद निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया में छिपा है।
🔹 EVM मशीनें पूरी तरह ऑफलाइन होती हैं
सबसे पहले समझें — EVM (Electronic Voting Machine) में किसी तरह का इंटरनेट या नेटवर्क कनेक्शन नहीं होता। यह एक standalone device है, यानी यह सिर्फ बटन दबाने और वोट रिकॉर्ड करने का काम करती है। EVM का किसी बाहरी सर्वर से कोई संपर्क नहीं रहता।
🔹 तो फिर वोटिंग प्रतिशत का डेटा कैसे आता है?
वोटिंग प्रतिशत की जानकारी EVM से नहीं, बल्कि पोलिंग अधिकारियों से मैन्युअली ली जाती है। हर मतदान केंद्र पर एक प्रेसाइडिंग ऑफिसर (Presiding Officer) होता है, जिसके पास वोटिंग की पूरी जिम्मेदारी होती है।
निर्धारित समय पर (जैसे 9 बजे, 11 बजे, 1 बजे आदि) वह यह रिपोर्ट तैयार करता है कि कुल मतदाताओं में से कितने लोगों ने वोट डाल दिया है। यह जानकारी फिर निम्नलिखित तरीकों से भेजी जाती है —
1. 📱 ब्लूटूथ या इंटरनेट से नहीं, बल्कि सुरक्षित मोबाइल एप्लिकेशन (ENCORE App) के जरिए चुनाव आयोग के सर्वर तक डेटा पहुंचाया जाता है।
2. जिन इलाकों में नेटवर्क नहीं होता, वहां यह जानकारी वायरलेस या फोन कॉल के जरिए कंट्रोल रूम में भेजी जाती है।
3. कंट्रोल रूम से यह डेटा जिला निर्वाचन कार्यालय और फिर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) तक पहुंचाया जाता है।
🔹 ENCORE सिस्टम क्या है?
ENCORE (Election Network for Communication and Reporting) एक चुनाव आयोग का अधिकृत प्लेटफॉर्म है, जिसमें सभी अधिकारी लॉगिन कर अपने-अपने मतदान केंद्रों का डेटा दर्ज करते हैं। यह सिस्टम पूरी तरह से प्रशासनिक रिपोर्टिंग के लिए है, न कि वोट गिनती के लिए।
🔹 निष्कर्ष
इसलिए जब आप टीवी पर देखते हैं कि —
> “सुबह 11 बजे तक 26% मतदान हुआ है”
तो इसका अर्थ यह नहीं है कि EVM ने यह डेटा भेजा है।
बल्कि यह आंकड़ा मतदान केंद्र के अधिकारियों द्वारा मैन्युअल रूप से दर्ज और रिपोर्ट किया गया होता है।
EVM इंटरनेट से कभी नहीं जुड़ती, और न ही जुड़ सकती है।
उसका एकमात्र काम है — मतदाता द्वारा दिया गया वोट रिकॉर्ड करना और सुरक्षित रखना।



