सरकार अधिसूचना वापस ले, अनिवार्य करना सही नहीं’, वंदे मातरम पर बोले मौलाना इमरान रशादी
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‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य किए जाने के मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। इस विषय पर धार्मिक विद्वान मौलाना इमरान रशादी ने बयान देते हुए कहा कि सरकार को संबंधित अधिसूचना पर पुनर्विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी देशभक्ति गीत या नारे को अनिवार्य करना उचित नहीं है।
मौलाना रशादी ने कहा कि देश के प्रति सम्मान हर नागरिक के दिल में होना चाहिए, लेकिन इसे बाध्यता के रूप में लागू करना संवेदनशील मुद्दा बन सकता है। उन्होंने संवाद और आपसी समझ के माध्यम से समाधान निकालने की बात कही।
पक्ष और विपक्ष की प्रतिक्रिया
इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ संगठनों ने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बताते हुए इसे अनिवार्य करने का समर्थन किया है, वहीं कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं।
सरकार का रुख
सरकार की ओर से अब तक इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, पहले दिए गए वक्तव्यों में यह कहा गया था कि देशभक्ति से जुड़े विषयों पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
यह मुद्दा फिलहाल सार्वजनिक चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर और बयानबाजी हो सकती है। Poonam Report



