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टैरिफ से बेहाल निर्यातकों को मिल सकता है तीन-चार माह का राहत पैकेज, तैयार हो रही है ग्राउंड रिपोर्ट

टैरिफ से बेहाल निर्यातकों को मिल सकता है तीन-चार माह का राहत पैकेज, तैयार हो रही है ग्राउंड रिपोर्ट

भारत के निर्यातकों के लिए इस समय हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका, यूरोप और चीन जैसे बड़े व्यापारिक साझेदारों की ओर से लगातार बढ़ते टैरिफ और आयात शुल्क ने भारतीय एक्सपोर्ट इंडस्ट्री को गहरी मार दी है। इसका असर सीधा-सीधा भारत के छोटे और मध्यम उद्योगों (SMEs) पर पड़ रहा है। अब खबर यह है कि केंद्र सरकार इस संकट को देखते हुए 3 से 4 महीने का अंतरिम राहत पैकेज लाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए वाणिज्य मंत्रालय ने ग्राउंड रिपोर्ट तैयार कराना शुरू कर दिया है, जो अगले कुछ हफ्तों में सरकार के सामने पेश की जाएगी।

निर्यातकों पर बढ़ता बोझ

पिछले एक साल में अमेरिका और यूरोप के बाजारों ने भारतीय उत्पादों पर कई गुना तक टैरिफ बढ़ा दिया है।

टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, लेदर और एग्रो प्रोडक्ट्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है।

लगातार गिरते ऑर्डर्स और विदेशी बाजारों से प्रतिस्पर्धा ने भारतीय निर्यातकों की कमर तोड़ दी है।

छोटे निर्यातक (SMEs) और कुटीर उद्योगों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।

सरकार का प्लान – क्या होगा राहत पैकेज में?

सूत्रों के अनुसार, सरकार इस पैकेज को अंतरिम राहत योजना के तौर पर लागू करेगी ताकि कंपनियों को तुरंत सहारा मिल सके।

1. एक्सपोर्ट क्रेडिट सपोर्ट – बैंकों के जरिए आसान शर्तों पर निर्यातकों को कर्ज मिलेगा।

2. ब्याज में छूट – मौजूदा लोन पर ब्याज दर कम करने की योजना पर विचार।

3. जीएसटी रिफंड में तेजी – निर्यातकों को लंबित टैक्स रिफंड जल्द उपलब्ध कराने पर जोर।

4. लॉजिस्टिक और ट्रांसपोर्ट सपोर्ट – बंदरगाहों पर लगने वाली अतिरिक्त लागत को कम करने की कोशिश।

5. नए बाजार की खोज – एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में भारत के निर्यात को बढ़ाने की योजना।

विशेषज्ञों और संगठनों की राय

भारतीय निर्यात संगठन (FIEO) ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने समय रहते राहत नहीं दी तो अगले 3 महीने में निर्यात में 12% तक की गिरावट हो सकती है।

टेक्सटाइल एसोसिएशन का कहना है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए तुरंत पैकेज जरूरी है।

एग्रो प्रोडक्ट एक्सपोर्टर्स का कहना है कि यूरोप में नए टैरिफ की वजह से वहां भारतीय चावल, मसाले और शुगर की डिमांड कम हो गई है।

इंजीनियरिंग गुड्स एसोसिएशन ने कहा है कि टैरिफ बढ़ने से मिडल ईस्ट में भी ऑर्डर कम हो रहे हैं।

भारत का निर्यात – वर्तमान स्थिति

2024-25 में भारत का कुल निर्यात लगभग 430 अरब डॉलर तक पहुंचा था।

लेकिन टैरिफ संकट के कारण इस वित्तीय वर्ष के पहले क्वार्टर में ही निर्यात में 7% की गिरावट दर्ज की गई है।

टेक्सटाइल, हैंडीक्राफ्ट और एग्रो प्रोडक्ट्स में सबसे बड़ी कमी देखी गई है।

यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो रोजगार पर भी गंभीर असर पड़ेगा क्योंकि भारत में करोड़ों लोग सीधे-परोक्ष रूप से निर्यात पर निर्भर हैं।

आगे का रोडमैप

वाणिज्य मंत्रालय ने सभी राज्यों से निर्यातकों की समस्याओं और ग्राउंड लेवल रिपोर्ट मांगी है। यह रिपोर्ट अक्टूबर के पहले हफ्ते तक तैयार होने की उम्मीद है। इसके आधार पर सरकार राहत पैकेज का स्वरूप तय करेगी।

अनुमान है कि अक्टूबर से पहले पैकेज लागू हो जाएगा।

पैकेज लागू होने से निर्यातकों को अस्थायी राहत मिलेगी और उन्हें विदेशी बाजारों में अपनी पकड़ बनाए रखने का समय मिलेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को केवल शॉर्ट-टर्म नहीं बल्कि लॉन्ग-टर्म रणनीति भी बनानी होगी ताकि भारत ग्लोबल मार्केट में स्थायी रूप से मजबूत हो सके।

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