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योगी सरकार में स्कूली शिक्षा को मिला नया आयाम, अब पढ़ाई केवल किताबों की नहीं, हुनर की भी होगी

  • सरकारी स्कूलों में ‘सीखते हैं करके’ कार्यक्रम से शिक्षा को मिला व्यावहारिक धरातल
  • 2025-26 में और 3288 स्कूलों में विस्तार की तैयारी
  • शिक्षा को किताबी ज्ञान से आगे ले जाकर कौशल, नवाचार और आत्म-निर्भरता की दिशा में एक क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही है सरकार
  • कक्षा 6 से 8 में पढ़ाई के साथ काष्ठ कर्म, धातु कार्य, ऊर्जा व पर्यावरण, कृषि-बागवानी, स्वास्थ्य व पोषण जैसे विषयों में दिया जा रहा व्यावहारिक प्रशिक्षण
  • बच्चों को हुनरमंद, स्वावलंबी और सक्षम नागरिक के रूप में तैयार करना है लक्ष्य: संदीप सिंह

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा को किताबी ज्ञान से आगे ले जाकर कौशल, नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही है। इसी कड़ी में समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रारंभ किया गया ‘सीखते हैं करके’ (लर्निंग बाई डूइंग) कार्यक्रम राज्य के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की परिभाषा ही बदल रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को धरातल पर उतारते हुए यह कार्यक्रम बच्चों को कक्षा 6 से 8 में पढ़ाई के साथ-साथ काष्ठ कर्म , धातु कार्य, ऊर्जा व पर्यावरण, कृषि-बागवानी, स्वास्थ्य व पोषण जैसे विषयों में व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रहा है। यह पहल शिक्षा को रोजगार और जीवन कौशल से जोड़ने की मुख्यमंत्री योगी की प्राथमिक सोच को मूर्त रूप दे रही है।

बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई बार यह कहा है कि उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाना है, तो शिक्षा को कौशल से जोड़ना ही होगा। इसी को ध्यान में रखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा विज्ञान और गणित के शिक्षकों को मल्टी स्किलिंग पर चार दिवसीय विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है, ताकि वे छात्रों को पधने के साथ उन्हें उनके वास्तविक जीवन के लिए तैयार करें। राज्य सरकार ने वठकउएऋ और विज्ञान आश्रम के तकनीकी सहयोग से 60 स्किल आधारित गतिविधियों का शिक्षक मैनुअल विकसित किया है, जिसे रउएफळ द्वारा अनुमोदित किया गया है।

2274 स्कूलों में लैब, लाखों बच्चों को मिलेगा लाभ

2024-25 में इस कार्यक्रम का विस्तार करते हुए राज्य के 75 जिलों के 2274 उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में आधुनिक छइऊ लैब्स की स्थापना की गई है। प्रत्येक लैब को 205 प्रकार के आधुनिक उपकरणों और औजारों से सुसज्जित किया गया है। इसके लिए स्कूल प्रबंधन समितियों (रटउ२) को उपभोज्य सामग्री और कच्चा माल उपलब्ध कराया गया है। ज्ञातव्य है कि इससे पहले पायलट परियोजना के तहत 15 जिलों के 60 विद्यालयों में यह कार्यक्रम शुरू किया गया था, जहाँ 5,937 विद्यार्थियों ने विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यक्रम के प्रभाव से स्कूलों में उपस्थिति दर और शिक्षण में रुचि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

2025-26 में और 3288 स्कूलों में विस्तार की तैयारी

योगी सरकार इस अभिनव कार्यक्रम को अगले चरण में और 3288 नए विद्यालयों में लागू करने की योजना पर कार्य कर रही है। समग्र शिक्षा और पीएमश्री योजना के अंतर्गत इसका विस्तार होगा, जिससे लाखों छात्र-छात्राएं व्यावसायिक शिक्षा से लाभान्वित होंगे।

‘श्रम की गरिमा’ को मिला मंच

कार्यक्रम ने न सिर्फ बच्चों को नया कौशल सिखाया, बल्कि ह्यश्रम की गरिमाह्ण का बोध भी कराया। खास बात यह रही कि लड़कियों ने भी इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल वर्क और वर्कशॉप गतिविधियों में खुलकर भाग लिया, जिससे लैंगिक समानता को बल मिला है।

‘सीखते हैं करके’ कार्यक्रम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के उस संकल्प का सजीव रूप है, जिसमें शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखते हुए उसे रोजगारपरक, व्यवहारिक और जीवनोपयोगी बनाने की परिकल्पना है। यह पहल न केवल बच्चों को हुनरमंद, स्वावलंबी और सक्षम नागरिक के रूप में तैयार कर रही है, बल्कि उत्तर प्रदेश को ह्यस्किल इंडिया मिशनह्ण से मजबूती से जोड़ते हुए एक सशक्त और आत्मनिर्भर राज्य की आधारशिला भी रख रही है।
— संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार

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