
6दशक बाद बड़ी राहत: 2,196 बांग्लादेशी शरणार्थी परिवारों को योगी सरकार देगी जमीन का मालिकाना हक
पीलीभीत, उत्तर प्रदेश – उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में रह रहे 2,196 बांग्लादेशी शरणार्थी परिवारों को 6 दशक बाद जमीन का मालिकाना हक मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ताजा निर्देशों के बाद इन परिवारों की दशकों पुरानी मांग पूरी होने जा रही है। इस फैसले से शरणार्थियों में उत्साह और खुशी की लहर दौड़ गई है।
🏠 1960 से बिना मालिकाना हक के रह रहे थे शरणार्थी
इन शरणार्थियों को 1960 में तत्कालीन सरकार द्वारा घर और खेती के लिए जमीन तो दी गई थी, लेकिन कभी मालिकाना हक नहीं मिला।
इसकी वजह से ये परिवार न केवल कानूनी अधिकारों से वंचित रहे, बल्कि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं उठा सके।
📜 मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद तेज़ होगी प्रक्रिया
पीलीभीत के जिला अधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि सरकार के आदेश के बाद अब आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। जैसे ही अंतिम दिशा-निर्देश मिलते हैं, संबंधित विभाग कानूनी दस्तावेजों का वितरण शुरू कर देंगे।हमारी पूरी कोशिश है कि शरणार्थी परिवारों को जल्द से जल्द उनका हक मिले।” – ज्ञानेंद्र सिंह, डीएम, पीलीभीत
🗳️ नेताओं ने बताया ऐतिहासिक कदम
बीजेपी जिला अध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह, पूर्व जिला पंचायत सदस्य मनजीत सिंह और अन्य स्थानीय नेताओं ने इस निर्णय को “ऐतिहासिक” और “न्यायपूर्ण” बताया।
यह उन हजारों परिवारों के संघर्ष का सम्मान है, जो वर्षों से अपनी जमीन पर हक की लड़ाई लड़ रहे थे।
✅ सत्यापन प्रक्रिया शुरू, दस्तावेज जल्द
पीलीभीत के 25 गांवों में बसे 2,196 परिवारों में से
1,466 परिवारों का सत्यापन पूरा हो चुका है
इनके दस्तावेज राज्य सरकार को भेजे जा चुके हैं
जल्द ही मालिकाना हक के कागज़ात वितरित किए जाएंगे
📍 किन गांवों को मिलेगा लाभ?
यह सुविधा कालीनगर और पुरानपुर तहसील के कई गांवों को मिलेगी, जिनमें शामिल हैं:
तातरगंज
बमनपुर
बैला
सिद्ध नगर
शास्त्री नगर
नेहरू नगर
और अन्य गांव
🎉 परिवारों में खुशी की लहर
इस निर्णय से न केवल शरणार्थी परिवारों को कानूनी मान्यता मिलेगी, बल्कि अब वे भी:
प्रधानमंत्री आवास योजना
कृषि सब्सिडी
राशन कार्ड
शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं
जैसी सरकारी योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ उठा सकेंगे।
✅ यह सिर्फ कागज़ का टुकड़ा नहीं, वर्षों का सपना है: स्थानीय नागरिक
स्थानीय नागरिकों और शरणार्थी परिवारों का कहना है कि यह निर्णय सिर्फ एक सरकारी आदेश नहीं, बल्कि उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ है। इससे अब उन्हें सम्मान और अधिकार दोनों मिलेगा।



