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लखनऊ में फर्जी CBI अफसर बनकर महिला को किया “डिजिटल अरेस्ट”, 56 लाख की ठगी; तीन आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ में फर्जी CBI अफसर बनकर महिला को किया “डिजिटल अरेस्ट”, 56 लाख की ठगी; तीन आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ/मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में एक महिला से 56 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले का बड़ा खुलासा हुआ है। लखनऊ साइबर सेल ने खुद को CBI अफसर बताकर “डिजिटल अरेस्ट” करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस गैंग ने बेहद सुनियोजित तरीके से महिला को धमकाकर करोड़ों की संपत्ति का हिस्सा हथिया लिया।

 कैसे किया गया डिजिटल अरेस्ट?

12 जुलाई को रीता भसीन नाम की महिला को फोन कर बताया गया कि उनका आधार और मोबाइल नंबर मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हुआ है।फिर वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी पहने शख्स ने उन्हें धमकाया और जेल भेजने की चेतावनी दी।महिला को फर्जी अरेस्ट वारंट भेजा गया और कहा गया कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्हें एकांत कमरे में रहना होगा, कैमरे के सामने रहना होगा और कोई अन्य सदस्य नजर न आए।आरोपियों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक उन्हें अपनी 99% संपत्ति एक कोर्ट अकाउंट में ट्रांसफर करनी होगी। डर और भ्रम की स्थिति में महिला ने 56 लाख रुपये पांच अलग-अलग बैंकों में ट्रांसफर कर दिए।

🚨 FIR मुंबई में दर्ज, गिरफ्तारी लखनऊ से

इस मामले की FIR मुंबई के अंधेरी ईस्ट थाने में दर्ज की गई थी।

जांच में सामने आया कि गिरोह का संचालन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से हो रहा था।

लखनऊ साइबर क्राइम टीम ने गैंग लीडर चित्रांश और उसके दो साथियों मोहन कुमार रावत व मोहम्मद जैद को गिरफ्तार किया।

🔍 कई सबूत बरामद, गैंग के और सदस्य पकड़ में

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने इनके पास से:

7 मोबाइल फोन

11 डेबिट कार्ड

2 क्रेडिट कार्ड

3 चेकबुक

ठगी से खरीदी गई महंगी Thar गाड़ी

1.70 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं

इससे पहले, 23 जुलाई को गिरोह के तीन और सदस्य गिरफ्तार किए गए थे। पुलिस का कहना है कि गैंग प्रोफेशनल ट्रेनिंग लेकर डिजिटल अरेस्ट की स्क्रिप्ट पर काम करता है।

📢 ADCP क्राइम लखनऊ का बयान

इस गिरोह को डिजिटल अरेस्ट की खास ट्रेनिंग दी जाती है। ये आमतौर पर बुजुर्ग और अशिक्षित लोगों को निशाना बनाते हैं। जिनके पास ज्यादा पैसा होता है, उनके बैंक अकाउंट की जानकारी भी पहले से जुटा ली जाती है।

– बसन्त कुमार, ADCP क्राइम, लखनऊ

⚠️ कैसे बचें ऐसी ठगी से?

किसी भी सरकारी एजेंसी से फोन, व्हाट्सएप या वीडियो कॉल पर डराने-धमकाने वाले कॉल फर्जी होते हैं।कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर पैसा ट्रांसफर न करें।FIR, वारंट या सुप्रीम कोर्ट आदेश जैसी बातें सुनते ही स्थानीय पुलिस या साइबर सेल से संपर्क करें!बुजुर्गों को डिजिटल जागरूकता दें।

🔐 निष्कर्ष:

“डिजिटल अरेस्ट” जैसे नए साइबर फ्रॉड अब भारत में बढ़ते जा रहे हैं। लखनऊ से गिरफ्तार हुए ये तीन आरोपी इस बात का प्रमाण हैं कि आधुनिक साइबर ठगों के पास न सिर्फ तकनीक है, बल्कि एक पूरी स्क्रिप्ट भी होती है।पुलिस अब इस गिरोह के राष्ट्रीय नेटवर्क की तलाश में जुटी है।

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