ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्याओं और फांसी पर लगा विराम’, ट्रंप का बड़ा दावा

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वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों की हत्याओं और फांसी की सजा पर फिलहाल रोक लगी है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और मानवाधिकार संगठनों की नजरें भी इस दावे पर टिक गई हैं।
ट्रंप ने यह दावा एक सार्वजनिक बयान के दौरान किया, जिसमें उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दबाव और सख्त रुख के चलते ईरानी शासन को कदम पीछे खींचने पड़े हैं। ट्रंप का कहना है कि ईरान में लंबे समय से चल रहे प्रदर्शनों के दौरान जिस तरह लोगों को गिरफ्तार कर फांसी दी जा रही थी, उस पर अब विराम लगा है।
मानवाधिकार मुद्दे पर बढ़ा दबाव
ईरान में पिछले कुछ वर्षों से महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक आज़ादी को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होते रहे हैं। इन प्रदर्शनों को कुचलने के लिए ईरानी प्रशासन पर बल प्रयोग, गिरफ्तारियों और फांसी जैसे गंभीर आरोप लगते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी ईरान की आलोचना की है।
ट्रंप के दावे को इसी दबाव का नतीजा बताया जा रहा है। हालांकि, अभी तक ईरानी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
बयान के पीछे राजनीति?
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान केवल मानवाधिकार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे अमेरिकी घरेलू राजनीति और ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है। ट्रंप पहले भी ईरान को लेकर कड़े बयान देते रहे हैं और परमाणु समझौते से लेकर प्रतिबंधों तक उनका रुख बेहद सख्त रहा है।
सच्चाई पर उठे सवाल
कुछ विशेषज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि मैदान से आ रही रिपोर्ट्स अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। कई संगठनों का दावा है कि ईरान में दमन की नीति पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, हालांकि उसकी तीव्रता में कमी आ सकती है। ऐसे में ट्रंप के बयान को लेकर सत्यापन जरूरी बताया जा रहा है।
कुल मिलाकर, ट्रंप का यह दावा अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान के मानवाधिकार रिकॉर्ड को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में ईरान की प्रतिक्रिया और स्वतंत्र रिपोर्ट्स से ही स्थिति साफ हो पाएगी।
Poonam Report



