High Court: 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर पिता से भरण-पोषण पाने का हकदार नहीं बेटा, परिवार न्यायालय का आदेश रद्द

हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद बेटा पिता से भरण-पोषण (Maintenance) पाने का स्वतः हकदार नहीं होता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय (फैमिली कोर्ट) द्वारा पारित उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पिता को बालिग बेटे को भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था।
क्या था मामला?
मामले में परिवार न्यायालय ने पिता को अपने बेटे को भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। हालांकि, बेटा 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुका था। पिता ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए दलील दी कि कानून के अनुसार बालिग पुत्र को नियमित भरण-पोषण देने की बाध्यता नहीं है।
हाईकोर्ट का स्पष्ट रुख
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि:
कानूनन 18 वर्ष की आयु के बाद पुत्र बालिग माना जाता है
सामान्य परिस्थितियों में बालिग बेटा पिता से भरण-पोषण का दावा नहीं कर सकता
परिवार न्यायालय ने आदेश पारित करते समय कानूनी प्रावधानों की अनदेखी की
इन्हीं कारणों से हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय का आदेश निरस्त कर दिया।
कब मिल सकता है अपवाद?
हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बेटा:
किसी गंभीर बीमारी या शारीरिक/मानसिक अक्षमता से पीड़ित हो
खुद का भरण-पोषण करने में असमर्थ हो
तो ऐसे विशेष मामलों में कानूनी अपवाद हो सकता है। लेकिन इस केस में ऐसा कोई आधार सामने नहीं आया।
फैसले का महत्व
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला:
भरण-पोषण से जुड़े मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश देता है
परिवार न्यायालयों के लिए नजीर का काम करेगा
अभिभावकों और बालिग संतानों के अधिकारों की सीमा तय करता है
निष्कर्ष
हाईकोर्ट का यह निर्णय साफ करता है कि बालिग होने के बाद पुत्र को स्वतः भरण-पोषण का अधिकार नहीं मिलता, जब तक कि कोई विशेष परिस्थिति न हो। यह फैसला पारिवारिक कानून के मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।
Poonam report



