मुरादाबाद के अटल आवासीय विद्यालय में भारतीय ज्ञान और कर्मयोग पर संवाद, विद्यार्थियों को चरित्र निर्माण का संदेश

मुरादाबाद के बिलारी स्थित अटल आवासीय विद्यालय में मंगलवार को ‘भारतीय ज्ञान एवं कर्मयोग’ विषय पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन आनंदघन लोक शिक्षा केंद्र, पुनरुत्थान विद्यापीठ के तत्वावधान में किया गया, जिसमें विद्यालय के शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता गीता प्रचारक स्वामी कृष्णानंद झा ने भारतीय ज्ञान परंपरा, शिक्षा के उद्देश्य और कर्मयोगी व्यक्तित्व निर्माण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विद्यार्थियों और शिक्षकों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल पढ़ाई या डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका उद्देश्य ज्ञान, चरित्र, कर्तव्य और जीवन निर्माण का समग्र विकास रहा है।
स्वामी कृष्णानंद झा ने भारतीय परंपरा में चतुर्दश विद्याओं का उल्लेख करते हुए चार वेद, छह वेदांग, न्याय, पुराण, धर्मशास्त्र और मीमांसा के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक काल में भारतीय शिक्षा व्यवस्था और ज्ञान परंपरा को नुकसान पहुंचा, जिसके कारण शिक्षा का संबंध जीवन-मूल्यों और कर्तव्यबोध से कमजोर हुआ।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऐसी शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है जो विद्यार्थियों को केवल रोजगार के लिए तैयार न करे, बल्कि उनके भीतर चरित्र, संस्कार, कर्तव्यबोध और सेवा-भाव भी विकसित करे। शिक्षा विद्यार्थियों को परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने तथा उन्हें निभाने के लिए प्रेरित करे।
कार्यक्रम के दौरान गीता और रामचरितमानस का संदर्भ देते हुए स्वामी कृष्णानंद झा ने विद्यार्थियों को कर्तव्य, मर्यादा, सेवा और समर्पण के भाव को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम के जीवन को आदर्श बताते हुए चरित्र निर्माण और कर्तव्य पालन के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने विद्यार्थियों को “भारत को जानो, भारत को मानो, भारतीय बनो” का सूत्र देते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का संदेश दिया। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक और छात्र-छात्राएं उत्साहपूर्वक शामिल हुए।
Poonam Report



