
विधानसभा में हंगामा:भाजपा नेताओं पर तेजस्वी यादव पर जानलेवा हमले और अभद्र भाषा के आरोप
पटना – बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान मंगलवार को एक बड़ा राजनीतिक हंगामा खड़ा हो गया। विपक्ष ने भाजपा के विधायकों जनक सिंह और संजय सिंह पर आरोप लगाया है कि उन्होंने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया और जानलेवा हमला करने की कोशिश की।
सिर्फ 12 मिनट चला सत्र, फिर मचा बवाल
शीतकालीन सत्र की शुरुआत होते ही हंगामा शुरू हो गया। जानकारी के अनुसार, सत्र मात्र 12 मिनट ही चल सका। इस दौरान भाजपा और राजद के विधायकों के बीच जबरदस्त नोकझोंक और आरोप-प्रत्यारोप हुए।
विपक्ष का आरोप है कि भाजपा विधायक संजय सिंह और जनक सिंह ने माइक उठाकर तेजस्वी यादव की ओर फेंकने की कोशिश की और उन्हें अपशब्द कहे।
तेजस्वी यादव का बयान: “अगर मारना है तो लाइसेंसी हथियार दे देता हूं
सदन से बाहर निकलते हुए तेजस्वी यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा:
माइक तोड़कर मुझे मारने की कोशिश की गई। अगर मेरे विधायक बीच-बचाव नहीं करते, तो कुछ भी हो सकता था। अगर मारना ही है तो बताइए, मैं अपना लाइसेंसी हथियार दे देता हूं। मार दीजिए मुझे। ऐसे थोड़ी होता है कि जो मुँह में आए बोल दिया और निकल गए।”
तेजस्वी ने एनडीए नेताओं पर तीखा हमला करते हुए कहा कि:
अशोक चौधरी और विजय सिन्हा ही एनडीए की बैठकों में एक-दूसरे को भ्रष्टाचारी कहते हैं। ये लोग एक-दूसरे पर विभाग लूटने का आरोप लगाते हैं और हमें ठेकेदार बताते हैं। अगर मैं अपराधी हूं, तो जेल में डाल दो, एनकाउंटर कर दो। हम तो सामने खड़े हैं।”
🔍 क्या है आरोप?
भाजपा विधायक जनक सिंह और संजय सिंह पर आरोप कि उन्होंने सदन में अश्लील भाषा का प्रयोग किया ,तेजस्वी यादव पर हमला करने की कोशिश की ,माइक फेंकने का प्रयास किया,राजद विधायकों ने बीच-बचाव कर तेजस्वी को बचाया l
🧾 विधानसभा सचिवालय की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल विधानसभा सचिवालय या स्पीकर की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन संभावना है कि इस मुद्दे पर जांच और कार्रवाई की मांग की जाएगी।
❗ राजनीतिक तनाव चरम पर
बिहार की राजनीति में इस घटना के बाद एक बार फिर राजद और भाजपा के बीच टकराव तेज हो गया है।
सवाल उठता है:
क्या यह लोकतंत्र के मंदिर (विधानसभा) में असहिष्णुता की नई मिसाल है?
क्या विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश हो रही है?
क्या सदन में मर्यादा अब सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह गई है?



