हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बुजुर्ग की देखभाल नहीं करने पर रद्द नहीं होगी गिफ्ट डीड, जिला अदालत का आदेश निरस्त

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में जिला अदालत द्वारा गिफ्ट डीड (उपहार विलेख) रद्द करने के आदेश को निरस्त कर दिया। मामला एक बुजुर्ग व्यक्ति द्वारा अपनी संपत्ति उपहार स्वरूप देने और बाद में देखभाल न मिलने के आरोप से जुड़ा था। हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ देखभाल न करने के आधार पर गिफ्ट डीड स्वतः रद्द नहीं की जा सकती, जब तक कि उपहार विलेख में ऐसी शर्त स्पष्ट रूप से दर्ज न हो या संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत उसे साबित न किया जाए।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि हर मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए। यदि गिफ्ट डीड बिना किसी स्पष्ट शर्त के स्वेच्छा से की गई है, तो बाद में केवल देखभाल न होने के आरोप के आधार पर उसे रद्द करना उचित नहीं माना जा सकता। इस आधार पर हाईकोर्ट ने जिला अदालत का आदेश रद्द करते हुए मामले में राहत प्रदान की।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला संपत्ति हस्तांतरण और वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जाएगा। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी मामले में धोखाधड़ी, दबाव या वरिष्ठ नागरिकों के संरक्षण संबंधी कानूनों के उल्लंघन के पर्याप्त साक्ष्य हों, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
Poonam Report



