UP: के संभल में दलित युवकों को खंभे से बांधकर पीटा, चोर बताकर भीड़ ने की पिटाई; दर्जनभर लोगों के खिलाफ FIR

संभल (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के संभल जिले से मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां कांवड़ यात्रा देखने आए दो दलित (SC) युवकों को उग्र भीड़ ने चोर बताकर खंभे से बांध दिया और बेरहमी से पीटा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसके बाद परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज किया है।
📍 क्या है पूरा मामला?
घटना 22 जुलाई की है, जब नाहर ढेर गांव निवासी सुंदर (20 वर्ष) अपने रिश्तेदार सन्नी (22 वर्ष) के साथ कांवड़ यात्रा देखने संभल गया था। रास्ते में दोनों युवक बढ़ई वाली बस्ती गांव के पास पहुंचे, तभी कुछ लोगों ने उन्हें चोर समझ लिया।
भीड़ ने बिना किसी पुष्टि के दोनों को बिजली के खंभे से बांध दिया।
इसके बाद उग्र लोगों ने दोनों की लाठी-डंडों से जमकर पिटाई की।
मौके पर मौजूद किसी ने वीडियो भी बना लिया, जो बाद में वायरल हो गया।
👩⚖️ मां की शिकायत पर दर्ज हुई FIR
पीड़ित सुंदर की मां की तहरीर पर नखासा थाना पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए:
5 नामजद और लगभग 12 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।SHO रजनीश कुमार ने बताया कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और पीड़ितों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
⚖️ किन धाराओं में दर्ज हुई FIR?
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ IPC की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिनमें शामिल हैं:
धारा 191(2): दंगा करना
धारा 190: अवैध रूप से भीड़ इकट्ठा करना
धारा 127(2): बंधक बनाना
धारा 115(2): जानबूझकर चोट पहुंचाना
धारा 352: अपमान और शांति भंग
धारा 351(2): आपराधिक धमकी
SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं भी शामिल की गई हैं।
🏥 अस्पताल में भर्ती कराए गए दोनों युवक
घटना के बाद दोनों युवकों को तुरंत सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों की हालत फिलहाल स्थिर है।
📢 प्रशासन और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया
स्थानीय प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों की गिरफ्तारी का भरोसा दिलाया है।दलित संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने घटना पर नाराज़गी जताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।
❗ निष्कर्ष: भीड़तंत्र नहीं, कानून पर हो भरोसा
यह घटना भीड़तंत्र (Mob Lynching) की भयावहता और कानून हाथ में लेने की प्रवृत्ति की गंभीर चेतावनी है। संदेह के आधार पर किसी को सज़ा देना न्याय नहीं, अपराध है। पुलिस और प्रशासन को चाहिए कि जल्द से जल्द दोषियों को गिरफ्तार कर सख्त उदाहरण पेश करें।



