
लखनऊ में निवेश का लालच, धमकी का डर… KGMU में डॉक्टरों से ऐंठे 30 लाख — जानें कैसे बनाया शिकार
लखनऊ | 05 अगस्त 2025 — केजीएमयू (किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी) के कुछ चिकित्सकों के साथ रिश्ते और पैसों के लालच को हथियार बनाकर करीब ₹30 लाख की ठगी और जबरन वसूली के मामले का खुलासा हुआ है। शिकायतों के मुताबिक, कुछ लोग पहले डॉक्टरों को आकर्षक निवेश का झांसा देते थे और बाद में धमकियाँ व दबाव बनाकर रकम ऐंठते रहे। पीड़ितों ने इस गिरोह की शिकायत अस्पताल प्रशासन व पुलिस में दर्ज कराई है, मामले की जांच जारी है।
मामला कैसे सामने आया?
पिछले दो महीनों में केजीएमयू के तीन चिकित्सक और एक तकनीशियन ने अलग-अलग समय में जिले की विभिन्न थानों में शिकायत दर्ज कराई। सभी ने एक ही तरह की स्कीम का जिक्र किया — शुरुआत में आरोपियों ने अपने आप को निवेश सलाहकार/बिज़नेसमैन बताया, छोटे-छोटे लाभ का वादा कर डॉक्टरों को पैसे लगाने के लिए मनाया गया। जब पैसे लगाए जा रहे थे तो आरोपियों ने संपर्क बढ़ाया और आगे की बड़ी वापसी का लालच दिखाया। पैसे लगने के बाद ही अचानक धमकियों, फोन कॉल और भविष्य धमकियों के जरिए अतिरिक्त रकम/हेरफेर के लिए दबाव बनाया गया।
> पीड़ितों में से एक चिकित्सक ने कहा, “हमने कुछ हजार रुपये निवेश के तौर पर दिए — बाद में दबाव बनकर कई गुना रकम मांगी गई। मना किया तो गालियाँ, फोन पर धमकियाँ और हमारे रिश्तेदारों को लेकर बेतुकी हरकतें की गईं।”
आरोपों का स्वरूप — लालच से जबरन वसूली तक
पुलिस रिकॉर्ड और पीड़ितों के बयानों से जो प्रमुख बिंदु मिले हैं, वे इस प्रकार हैं:
प्रारम्भ में निवेश/बिजनेस पार्टनर बनने का प्रलोभन; मध्यस्थों के जरिए संपर्क।
बाद में “रिश्वत/पढ़ाई/सिफारिश” के नाम पर अतिरिक्त धन की मांग।
न देने पर यौन, सामाजिक प्रतिष्ठा एवं जान से मारने की धमकियाँ; कुछ मामलों में आरोपियों ने चिकित्सकों के परिवार के सदस्यों के बारे में गलत सूचनाएँ वायरल करने की धमकी दी।
भुगतान के बाद भी शांत नहीं रखा गया; और पैसे की मांग जारी रही।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
केजीएमयू प्रशासन ने मामले की जानकारी मिलते ही हाइ-लेवल मीटिंग बुलाई। अस्पताल के प्रवक्ता ने बताया कि अस्पताल ने प्रभावित चिकित्सकों को सुरक्षा मुहैया कराई है और पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों के साथ सहयोग किया जा रहा है।
स्थानीय थाने के निरीक्षक ने कहा:
> “हमने कई शिकायतें प्राप्त की हैं और कुछ शुरुआती पड़ताल में संदिग्ध लोगों की पहचान हुई है। आरोपियों के मोबाइल कॉल-डेटा और बैंक ट्रांज़ैक्शन की विवेचना शुरू कर दी गई है। जिन लोगों ने धमकियाँ दी, उनके खिलाफ कठोर धाराओं के तहत कार्रवाई होगी।”
पुलिस ने बताया कि मामला साइबर फ्रॉड और बदनामी/धमकी का मिश्रित रूप है; जांच में बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य निर्णायक होंगे।
किस धाराओं में हो सकती कार्रवाई
कानून विशेषज्ञों के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ निम्नलिखित धाराएँ लागू की जा सकती हैं (जांच के आधार पर):
धोखाधड़ी / ठगी (IPC की संबंधित धाराएँ)
जबरन वसूली/धमकी (Extortion)
साइबर अपराध/ऑनलाइन धमकी
मानहानि/प्रसार्य फरेब
मुक़दमे के दौरान बैंक और कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप चैट व गवाह अहम साबित होंगे।
केजीएमयू में सुरक्षा-व्यवस्था पर सवाल
यह मामला सिर्फ आर्थिक क्षति का नहीं, बल्कि अस्पताल के अंदर कर्मियों की सुरक्षा और मनोवैज्ञानिक माहौल पर चोट भी है। डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों के बीच और बाहरी लोगों के संपर्क में रहने के कारण ऐसे दबाव का शिकार बनना आसान होता है। अस्पताल प्रशासन ने चिकित्सा स्टाफ के लिए सूचना-सत्र और सुरक्षा-प्रोटोकॉल कड़े करने का आश्वासन दिया है।
पीड़ितों का आग्रह और आगे की उम्मीदें
पीड़ित चिकित्सक सार्वजनिक होने से हिचक रहे हैं—वे कहते हैं कि स्तब्धता और बदनामी का डर भी था। अब वे चाह रहे हैं कि प्रशासन एवं पुलिस तेज़ी से आरोपियों को पकड़कर जनता के सामने उदाहरण कायम करे, ताकि और चिकित्सक ऐसी हताशा में ना रहें।
एक वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा:
> “हम मरीजों की जान बचाते हैं — हमारी प्रतिष्ठा और सुरक्षा भी मायने रखती है। प्रशासन को चाहिए कि वह स्पष्ट सुरक्षा गाइडलाइन जारी करे और जल्द कार्रवाई दिखाए।”
क्या कदम उठाए जा रहे हैं — तत्काल उपाय
अस्पताल ने स्टाफ-सुरक्षा के लिए कॉन्टेक्ट-हेल्पलाइन जारी की है।
प्रभावित डॉक्टरों को अस्थायी सुरक्षा दी जा रही है।
पुलिस ने बैंक-ट्रांजैक्शन और कॉल-रजिस्टर की डिटेल मांग ली है।
साइबर सेल के साथ मिलकर डिजिटल ट्रेल का विश्लेषण किया जा रहा है।
केजीएमयू में डॉक्टरों के साथ हुए इस घिनौने शोषण ने स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वालों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर अस्पताल सेवाओं की विश्वसनीयता और कर्मियों का मनोबल बचाए रखना जरूरी है, वहीं कानून को भी यह स्पष्ट संदेश देना होगा कि निवेश के झांसे और धमकियों के माध्यम से किसी की आजीविका नहीं छीनी जा सकती। जांच के बाद यदि अपराध सिद्ध हुआ तो आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई होने की उम्मीद है।



