
ऑरोविल में बृहस्पतिवार को विकास, डिजिटल नवाचार और अध्यात्म के समन्वय पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण मंथन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान सतत विकास, डिजिटल करेंसी नवाचार और समग्र शिक्षा जैसे अहम विषयों पर विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और प्रतिभागियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई।
डिजिटल करेंसी और भविष्य की अर्थव्यवस्था
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल मुद्रा आने वाले समय में वैश्विक और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है।
डिजिटल लेनदेन की पारदर्शिता
वित्तीय समावेशन
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में तकनीक की पहुंच
जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार रखे गए। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि डिजिटल करेंसी को अपनाते समय सुरक्षा और जागरूकता बेहद जरूरी है।
सतत विकास पर जोर
मंथन सत्र में सतत विकास (Sustainable Development) को ऑरोविल की मूल भावना से जोड़ते हुए पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के संतुलित उपयोग और सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि विकास तभी सार्थक है, जब वह प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखे।
समग्र शिक्षा और अध्यात्म का संगम
कार्यक्रम में समग्र शिक्षा प्रणाली पर भी चर्चा हुई, जिसमें—
शैक्षणिक ज्ञान
नैतिक मूल्य
मानसिक और आध्यात्मिक विकास
को समान महत्व देने की बात कही गई। वक्ताओं का मानना था कि शिक्षा सिर्फ रोजगार तक सीमित न रहकर व्यक्ति के संपूर्ण विकास का माध्यम बने।
प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी
मंथन के दौरान प्रतिभागियों ने सवाल-जवाब सत्र में खुलकर अपने विचार रखे। डिजिटल तकनीक और अध्यात्म के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, इस पर भी रोचक चर्चा देखने को मिली।
इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि डिजिटल प्रगति, सतत विकास और अध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि सही दिशा में मिलकर समाज को आगे बढ़ाने के मजबूत आधार बन सकते हैं।
Poonam report
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