फरियादी
पानीपत में फरियादियों की समस्याओं को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायत लेकर पहुंचे लोगों का कहना है कि यहां समस्या का समाधान कम, भरोसे में लेने का काम ज्यादा किया जा रहा है। अधिकारी आश्वासन तो देते हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
सुनवाई होती है, कार्रवाई नहीं
फरियादियों के अनुसार—
शिकायत दर्ज कर ली जाती है
फाइल आगे बढ़ाने का आश्वासन मिलता है
“जल्द समाधान होगा” कहकर लौटा दिया जाता है
लेकिन हफ्तों और महीनों बीत जाने के बाद भी समस्या वहीं की वहीं बनी रहती है।
रोज़मर्रा की समस्याओं से परेशान लोग
पानीपत में लोग जिन समस्याओं को लेकर भटक रहे हैं, उनमें—
बिजली और पानी की दिक्कत
सड़क और नाली की खराब स्थिति
जमीन और कब्जे से जुड़े विवाद
सरकारी दफ्तरों के चक्कर
शामिल हैं। फरियादियों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होती।
भरोसे में लेकर शांत करने का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई मामलों में अधिकारी—
फरियादी को भरोसे में लेकर शांत कर देते हैं
लिखित जवाब या समय-सीमा तय नहीं करते
जिम्मेदारी एक विभाग से दूसरे विभाग पर डाल दी जाती है
इससे आम जनता का प्रशासन से भरोसा धीरे-धीरे टूट रहा है।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि—
सभी शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है
कुछ मामलों में प्रक्रिया और नियमों के कारण समय लग रहा है
जल्द ही लंबित मामलों का निपटारा किया जाएगा
हालांकि फरियादियों को अब सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस समाधान की उम्मीद है।
सवाल बरकरार
सबसे बड़ा सवाल यही है कि
क्या पानीपत में फरियादियों की समस्याओं का वाकई समाधान होगा, या वे यूं ही भरोसे में लेकर टाले जाते रहेंगे?
अब देखना यह है कि प्रशासन इस भरोसे को काम में बदलता है या सिर्फ बातों तक ही सीमित रहता है।
Poonam report
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