नई दिल्ली। देश में माल ढुलाई व्यवस्था को और मजबूत करने तथा लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने की दिशा में रेलवे बड़े स्तर पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में 45 नए गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल (GCT) विकसित करने की योजना सामने आई है। इन टर्मिनलों के निर्माण और विकास पर करीब ₹3,600 करोड़ के निवेश की बात कही गई है। योजना के तहत सभी प्रस्तावित टर्मिनलों को वित्त वर्ष 2027-28 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।
गति शक्ति कार्गो टर्मिनलों का उद्देश्य उद्योगों, किसानों और व्यापारिक संस्थानों के लिए माल को रेल नेटवर्क के जरिए अधिक सुविधाजनक और किफायती तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना है। नए टर्मिनलों के विकसित होने से माल की लोडिंग-अनलोडिंग, भंडारण और रेल से सड़क तक कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे विशेष रूप से सीमेंट, स्टील, बिजली, कृषि उत्पाद, खनिज और अन्य भारी माल की ढुलाई को लाभ मिल सकता है।
रेलवे पहले से ही गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल नीति के तहत निजी निवेश को बढ़ावा दे रहा है। रेलवे के अनुसार, जुलाई 2026 तक देश में 142 GCT चालू हो चुके हैं, जिनकी अनुमानित माल संभालने की क्षमता करीब 224 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है। इन टर्मिनलों के माध्यम से लगभग ₹10,000 करोड़ का निजी निवेश जुटाया जा चुका है। वर्ष 2025-26 में इन टर्मिनलों पर करीब 146 मिलियन टन माल संभाला गया।
गति शक्ति कार्गो टर्मिनलों की स्थापना का मुख्य उद्देश्य माल ढुलाई को उत्पादन और खपत वाले क्षेत्रों के करीब लाना है। इसके लिए टर्मिनल की जगह का चयन उद्योगों की मांग, संभावित कार्गो ट्रैफिक, रेलवे की उपलब्ध सुविधाओं और क्षेत्र की लॉजिस्टिक्स क्षमता को ध्यान में रखकर किया जाता है। इन टर्मिनलों पर आधुनिक वेयरहाउसिंग, सिलोज, कोल्ड स्टोरेज और अन्य लॉजिस्टिक्स सुविधाएं भी विकसित की जा सकती हैं।
रेलवे के लिए यह योजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में माल ढुलाई का बड़ा हिस्सा सड़क मार्ग से होता है। रेल नेटवर्क के जरिए भारी मात्रा में माल की आवाजाही बढ़ने से परिवहन व्यवस्था अधिक व्यवस्थित होने के साथ-साथ लंबी दूरी की माल ढुलाई में लागत और समय को कम करने में मदद मिल सकती है।
इस पूरी योजना से निजी क्षेत्र की भागीदारी भी बढ़ने की उम्मीद है। नए टर्मिनलों के निर्माण के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। जिन क्षेत्रों में बड़े उद्योग, कृषि उत्पादन या खनिज आधारित गतिविधियां हैं, वहां बेहतर रेल-लिंक्ड कार्गो सुविधाएं माल को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने में उपयोगी साबित हो सकती हैं।
सरकार पहले ही GCT नेटवर्क के विस्तार पर जोर दे रही है। रेलवे के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 142 टर्मिनल चालू होने के अलावा 310 अन्य स्थानों पर GCT के विकास के लिए सैद्धांतिक मंजूरी भी दी जा चुकी है। इससे आने वाले वर्षों में देश का रेल आधारित माल ढुलाई नेटवर्क और व्यापक होने की संभावना है।
ऐसे में 45 नए टर्मिनलों की प्रस्तावित योजना को रेलवे की व्यापक लॉजिस्टिक्स रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यदि निर्धारित समयसीमा के अनुसार इन टर्मिनलों को वित्त वर्ष 2027-28 तक चालू किया जाता है, तो इससे देश में रेल आधारित माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाने और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।
Poonam Report



