दिल्ली में छात्रों की सुरक्षा को लेकर उपराज्यपाल ने सख्त रुख अपनाया है। छात्र सुरक्षा से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर जोर दिया गया है। इसके तहत पुलिस अधिकारियों को स्कूलों और अन्य शिक्षण संस्थानों में जाकर छात्रों के साथ संवाद करने और उनकी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को समझने के निर्देश दिए गए हैं।
इस पहल का उद्देश्य छात्रों को अपनी समस्याएं सीधे पुलिस के सामने रखने के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल उपलब्ध कराना है। पुलिस अधिकारियों द्वारा संवादात्मक सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें छात्रों को व्यक्तिगत सुरक्षा, ऑनलाइन सुरक्षा और आपात स्थिति में सहायता लेने जैसे विषयों पर जागरूक किया जाएगा।
दिल्ली पुलिस पहले से ही स्कूलों के साथ मिलकर बाल सुरक्षा और जागरूकता कार्यक्रम चला रही है। जुलाई 2026 में भी विभिन्न पुलिस जिलों में छात्रों के लिए उम्र के अनुरूप सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए थे।
नई व्यवस्था में केवल पुलिस की ओर से जानकारी देने के बजाय छात्रों की बात सुनने पर भी जोर रहेगा। इससे विद्यार्थियों को स्कूल या आसपास की सुरक्षा से जुड़ी किसी समस्या की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। पुलिस और स्कूल प्रशासन के बीच नियमित संपर्क से शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली पुलिस के कई जिलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियानों में स्कूलों, शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय को भी शामिल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना और उन्हें किसी समस्या की स्थिति में उचित सहायता लेने के बारे में जानकारी देना है।
एलजी के निर्देशों के बाद अब पुलिस और शिक्षण संस्थानों के बीच सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है। छात्रों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना केवल पुलिस या स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार, शिक्षकों और पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।
आने वाले समय में छात्रों के साथ होने वाले ऐसे संवादात्मक सत्रों को और व्यापक किए जाने की उम्मीद है। इससे विद्यार्थियों और पुलिस के बीच भरोसा बढ़ाने के साथ-साथ सुरक्षा संबंधी समस्याओं की पहचान और समाधान में भी मदद मिल सकती है।
Poonam Report



