बड़ी खबर

अंतरिक्ष में पहुंचा Google का AI सैटेलाइट, Project Suncatcher से शुरू हुआ स्पेस डेटा सेंटर का परीक्षण

नई दिल्ली। गूगल ने अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग की संभावनाओं को परखने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने Planet के साथ साझेदारी में तैयार अपना प्रोटोटाइप सैटेलाइट सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचा दिया है। यह मिशन Google के Project Suncatcher का हिस्सा है, जिसके जरिए भविष्य में अंतरिक्ष में बड़े पैमाने पर मशीन लर्निंग और AI कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने की संभावना का अध्ययन किया जा रहा है। Google के मुताबिक सैटेलाइट से संपर्क स्थापित हो चुका है और यह उम्मीद के मुताबिक काम कर रहा है।

इस सैटेलाइट को SpaceX के Transporter-18 राइडशेयर मिशन के तहत Falcon 9 रॉकेट से लॉन्च किया गया। लॉन्च कैलिफोर्निया स्थित वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से हुआ। सैटेलाइट में Google के Tensor Processing Units यानी TPU लगाए गए हैं। ये विशेष चिप्स मशीन लर्निंग और AI से जुड़े कंप्यूटिंग कार्यों के लिए डिजाइन किए गए हैं।

Project Suncatcher का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या अंतरिक्ष में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करके AI कंप्यूटिंग को बड़े स्तर पर संचालित किया जा सकता है। Google के अनुसार, लो अर्थ ऑर्बिट में मौजूद सैटेलाइट लंबे समय तक सूर्य के प्रकाश के संपर्क में रह सकते हैं, जिससे सौर ऊर्जा का उपयोग किया जा सकता है। भविष्य की योजना में कई सैटेलाइट को एक साथ जोड़कर अंतरिक्ष आधारित कंप्यूटिंग सिस्टम तैयार करने की संभावना भी शामिल है।

मौजूदा मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह जांचना है कि AI चिप्स अंतरिक्ष के कठिन वातावरण में किस तरह काम करते हैं। अंतरिक्ष में रेडिएशन, तापमान में अत्यधिक बदलाव और लॉन्च के दौरान आने वाले दबाव जैसी परिस्थितियां इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए चुनौती बन सकती हैं। Google आने वाले समय में सैटेलाइट से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर अपने डिजाइन और तकनीक में सुधार करने की योजना पर काम करेगा।

स्पेस आधारित AI कंप्यूटिंग के सामने सबसे बड़ी तकनीकी चुनौतियों में से एक चिप्स से निकलने वाली गर्मी को नियंत्रित करना है। पृथ्वी पर कंप्यूटर सिस्टम को ठंडा करने के लिए हवा और पानी जैसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन अंतरिक्ष के निर्वात में यह प्रक्रिया अलग तरीके से करनी पड़ती है। इसके लिए रेडिएटर और हीट पाइप जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

Google की योजना आगे चलकर ऐसे सैटेलाइट सिस्टम विकसित करने की है, जिनमें बड़ी संख्या में TPU चिप्स लगाए जा सकें और सैटेलाइट आपस में लेजर संचार के माध्यम से जुड़े रहें। हालांकि अभी यह शुरुआती शोध चरण है और अंतरिक्ष में बड़े AI डेटा सेंटर स्थापित करने से पहले लागत, कूलिंग, रखरखाव, संचार और विश्वसनीयता जैसी कई चुनौतियों का समाधान करना होगा।

Project Suncatcher का यह पहला प्रोटोटाइप मिशन इसी तकनीक की व्यवहारिकता को परखने की दिशा में शुरुआती कदम है। आने वाले परीक्षणों से यह समझने में मदद मिलेगी कि अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग को किस तरह अधिक प्रभावी और विश्वसनीय बनाया जा सकता है।

Poonam Report.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button