हाईकोर्ट का अहम फैसला: दैनिक वेतन की सेवा को पेंशन में जोड़ा जाएगा, यूपी सरकार की विशेष अपील खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दैनिक वेतन पर लंबे समय तक काम करने वाले कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमितीकरण से पहले की लंबी दैनिक वेतन सेवा को पेंशन योग्य सेवा से अलग नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि कर्मचारी ने लंबे समय तक लगातार सेवा की है और राज्य यह साबित नहीं कर पाता कि उसने निर्धारित 240 दिन की सेवा पूरी नहीं की थी, तो केवल दैनिक वेतन कर्मचारी होने के आधार पर उसे पेंशन लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
यह फैसला न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष अपील खारिज करते हुए सुनाया। सरकार ने एकल पीठ के मार्च 2022 के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने मामले में लंबी सेवा को पेंशन से बाहर रखने को अनुचित और अतार्किक माना।
मामला कुशीनगर नगर पालिका के कर्मचारी राम प्रसाद यादव से जुड़ा है। अदालत को बताया गया कि उन्होंने 31 मार्च 1989 से एक सितंबर 2011 तक दैनिक वेतन पर काम किया। इसके बाद उन्हें क्लर्क पद पर नियमित किया गया। सेवानिवृत्ति के बाद नगर पालिका की ओर से उनकी पेंशन रोक दी गई थी। इसके बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2019 के प्रेम सिंह फैसले का भी उल्लेख किया। अदालत के अनुसार लंबे समय तक की गई वास्तविक सेवा को केवल इस आधार पर पेंशन योग्य सेवा से बाहर करना उचित नहीं है कि कर्मचारी की शुरुआती नियुक्ति दैनिक वेतन के आधार पर हुई थी।
इस फैसले का महत्व उन कर्मचारियों के लिए अधिक है, जिन्होंने नियमित नियुक्ति से पहले लंबे समय तक दैनिक वेतन या इसी तरह की व्यवस्था में काम किया और बाद में नियमित हुए। ऐसे मामलों में पेंशन की गणना से पहले की सेवा को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। हाईकोर्ट के इस आदेश से ऐसे कर्मचारियों को राहत मिलने की संभावना है, हालांकि प्रत्येक मामले में संबंधित सेवा रिकॉर्ड और लागू नियमों के आधार पर स्थिति तय होगी।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार किसी कर्मचारी की 240 दिन की सेवा पूरी न होने का दावा करती है, तो उसे इसके समर्थन में तथ्य और रिकॉर्ड प्रस्तुत करने होंगे। केवल सेवा को दैनिक वेतन या अस्थायी बताकर पेंशन लाभ से बाहर करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
इस फैसले के बाद लंबे समय तक दैनिक वेतन पर काम करने के बाद नियमित हुए कर्मचारियों के पेंशन मामलों में नई कानूनी स्थिति सामने आई है। अब संबंधित विभागों को ऐसे मामलों में कर्मचारी की वास्तविक सेवा अवधि और उपलब्ध रिकॉर्ड को ध्यान में रखकर पेंशन संबंधी दावों पर विचार करना होगा।
Poonam Report



