
मस्जिद में अखिलेश यादव की बैठक पर भाजपा का हमला, डिंपल यादव का पलटवार – जानिए क्या कहा
नई दिल्ली/लखनऊ – संसद भवन के पास स्थित एक मस्जिद में समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव की बैठक को लेकर सियासत गरमा गई है।नई दिल्ली/लखनऊ – संसद भवन के समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव की बैठक को लेकर सियासत गरमा गई है। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा ने इस पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने मस्जिद को सपा का “कार्यालय” बना दिया है। इस आरोप के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है।
भाजपा ने लगाए गंभीर आरोप
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा करते हुए कहा कि अखिलेश यादव मस्जिद में सपा सांसदों के साथ बैठक कर रहे हैं, जो अनुचित है। भाजपा ने इसे धार्मिक स्थल का ‘राजनीतिक दुरुपयोग’ बताया और कड़ी आलोचना की।
अखिलेश यादव का जवाब – “आस्था जोड़ती है, भाजपा बाँटती है”
विवाद बढ़ने पर अखिलेश यादव ने सफाई देते हुए कहा,
आस्था जोड़ने का काम करती है और हम उसके साथ हैं। भाजपा को तकलीफ है कि लोग जुड़ें नहीं। वह चाहती है कि लोग बंटे रहें। हमारी सभी धर्मों में आस्था है। भाजपा का हथियार ही धर्म है।”
अखिलेश ने भाजपा पर समाज को धर्म के नाम पर बाँटने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा को “जोड़ने” वाली राजनीति से डर लगता है।
डिंपल यादव भी आईं सामने
इस मुद्दे पर डिंपल यादव ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा हर बार धार्मिक भावनाओं को भड़काकर राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है, लेकिन जनता अब इन चीजों को समझ चुकी है। उन्होंने पूछा,
अगर किसी नेता ने मस्जिद में जाकर लोगों से संवाद किया तो इसमें आपत्ति क्या है? क्या यह अपराध है?”
यूपी डिप्टी सीएम का पलटवार
वहीं, इस मामले पर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने पलटवार करते हुए कहा,
समाजवादी पार्टी हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति करती रही है। मस्जिद को पार्टी कार्यालय बनाना उनकी इसी सोच को दिखाता है।”
विश्लेषण:
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब संसद का मानसून सत्र चल रहा है और सभी राजनीतिक दल अपने-अपने मुद्दों को धार दे रहे हैं। यह मुद्दा चुनावी रणनीति और धार्मिक राजनीति के पुराने विवादों की फिर से याद दिला दिया l



