भोपाल में मास्टर प्लान को लेकर सड़क पर उतरे लोग, आरिफ मसूद बोले- उज्जैन का प्लान आ सकता है तो भोपाल का क्यों नहीं?

भोपाल के लंबे समय से लंबित मास्टर प्लान को लेकर एक बार फिर सियासत और शहरवासियों की मांग तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की अगुवाई में बुधवार को ‘रन फॉर मास्टर प्लान’ का आयोजन किया गया। 11 नंबर बस स्टॉप से शुरू हुई इस दौड़ में युवा, महिलाएं, छात्र, व्यापारी और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए। अभियान के जरिए भोपाल का मास्टर प्लान जल्द लागू करने की मांग उठाई गई।
आरिफ मसूद ने कहा कि भोपाल का मास्टर प्लान लंबे समय से अटका हुआ है, जबकि उज्जैन की विकास योजना 2035 को वर्ष 2023 में स्वीकृति मिल चुकी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उज्जैन का प्लान आगे बढ़ सकता है तो राजधानी भोपाल का मास्टर प्लान क्यों लंबित है। मध्य प्रदेश विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार भोपाल की विकास योजना 2005 वर्ष 1995 में स्वीकृत हुई थी, जबकि उज्जैन की विकास योजना 2035 वर्ष 2023 में स्वीकृत हुई।
मसूद ने आरोप लगाया कि मास्टर प्लान के अभाव में शहर में जमीन के उपयोग, आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों और निर्माण से जुड़े मामलों में लोगों को परेशानी हो रही है। उन्होंने सरकार से जल्द प्रक्रिया पूरी कर मास्टर प्लान लागू करने की मांग की। उनका कहना है कि इस मुद्दे को राजनीतिक विवाद के बजाय शहर के भविष्य और विकास से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
भोपाल में मास्टर प्लान को लेकर विवाद नया नहीं है। इससे पहले भी कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद इस मुद्दे पर प्रदर्शन और धरना कर चुके हैं। 5 सितंबर को उन्होंने कहा था कि यदि पहले से तैयार ड्राफ्ट को औपचारिक रूप से रद्द नहीं किया गया है तो नया ड्राफ्ट तैयार करने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने दावा किया था कि नए ड्राफ्ट को तैयार करने, प्रकाशित करने और दावे-आपत्तियां लेने की प्रक्रिया में कई महीने लग सकते हैं।
मास्टर प्लान का मुद्दा शहर में चल रही सीलिंग कार्रवाई से भी जुड़ गया है। सितंबर की शुरुआत में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि सरकार भोपाल के मास्टर प्लान को जल्द जारी करने की दिशा में काम कर रही है। इसी दौरान आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नगर निगम की कार्रवाई के कारण व्यापारियों और संपत्ति मालिकों में भी चिंता बनी हुई है।
आरिफ मसूद का कहना है कि मास्टर प्लान लागू होने से आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों के उपयोग को लेकर अधिक स्पष्टता आएगी और भविष्य के विकास के लिए व्यवस्थित ढांचा तैयार किया जा सकेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि मास्टर प्लान और सीलिंग की समस्या अलग-अलग विषय हैं और केवल मास्टर प्लान आने से सीलिंग का हर विवाद स्वतः खत्म नहीं होगा।
अब निगाह इस बात पर है कि सरकार भोपाल के मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने और लागू करने की प्रक्रिया को कितनी तेजी से आगे बढ़ाती है। फिलहाल ‘रन फॉर मास्टर प्लान’ के जरिए उठी मांग ने इस पुराने मुद्दे को एक बार फिर शहर की राजनीति और सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
Poonam Report



