यूपी में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती से भुगतान तक पूरी व्यवस्था होगी ऑनलाइन, सीएम योगी ने लॉन्च किया लोगो
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती और उनके भुगतान की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़ी व्यवस्था के लिए बनाए गए नए सिस्टम का लोगो लॉन्च किया। इसके तहत भर्ती से लेकर कर्मचारियों के भुगतान तक की प्रक्रिया को ऑनलाइन और व्यवस्थित तरीके से संचालित करने पर जोर दिया जाएगा।
नई व्यवस्था का उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती में पारदर्शिता बढ़ाना और उन्हें समय पर वेतन तथा अन्य निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध कराना है। अब अलग-अलग विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया को एक केंद्रीकृत व्यवस्था के तहत लाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतों पर रोक लगाने और कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने की कोशिश होगी।
इसके लिए उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड की व्यवस्था की गई है। पहले विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति निजी एजेंसियों के माध्यम से होती थी। नई व्यवस्था में एजेंसियों का चयन और कर्मचारियों की भर्ती अधिक पारदर्शी प्रक्रिया के तहत कराने का प्रावधान किया गया है।
नई प्रणाली में भर्ती प्रक्रिया के दौरान आवेदन और संबंधित प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से संचालित करने पर जोर रहेगा। योग्य अभ्यर्थियों के चयन के लिए लिखित परीक्षा और साक्षात्कार जैसी प्रक्रियाओं का प्रावधान किया गया है। इससे आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति में योग्यता और पारदर्शिता को प्राथमिकता देने की कोशिश की जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत चयनित आउटसोर्स कर्मचारियों को तीन वर्ष की अवधि के लिए नियुक्त किए जाने का प्रावधान है। कर्मचारियों को निर्धारित मानदेय के साथ सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की योजना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कर्मचारियों का मासिक मानदेय करीब ₹16,000 से ₹20,000 तक रखा गया है और भुगतान हर महीने की पहली से पांचवीं तारीख के बीच सीधे बैंक खाते में किए जाने की व्यवस्था बताई गई है।
इसके अलावा कर्मचारियों के लिए ईपीएफ और ईएसआई जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं को भी व्यवस्था में शामिल किया गया है। महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश और पात्र कर्मचारियों को आरक्षण संबंधी लाभ देने का भी प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों को केवल नियुक्ति तक सीमित न रखकर उनके रोजगार से जुड़े अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा को भी मजबूत करना है।
सरकार का मानना है कि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से भर्ती, नियुक्ति, उपस्थिति, भुगतान और संबंधित रिकॉर्ड को डिजिटल तरीके से व्यवस्थित रखा जा सकेगा। इससे कर्मचारियों और विभागों के बीच प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता बढ़ेगी तथा भुगतान में होने वाली देरी या अन्य शिकायतों की निगरानी करना आसान होगा।
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों पर होने वाला सरकारी खर्च भी बढ़ा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2019-20 में आउटसोर्स कर्मचारियों से संबंधित बजट करीब ₹684.19 करोड़ था, जो 2025-26 तक बढ़कर लगभग ₹1,796.93 करोड़ हो गया। ऐसे में कर्मचारियों की बढ़ती संख्या और उनसे जुड़े खर्च को देखते हुए सरकार के लिए एक व्यवस्थित और केंद्रीकृत व्यवस्था की जरूरत भी बढ़ी है।
नई व्यवस्था को लागू करने के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती में पारदर्शिता, समय पर भुगतान और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। आने वाले समय में ऑनलाइन व्यवस्था के पूरी तरह लागू होने के बाद भर्ती से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया में कर्मचारियों को अधिक स्पष्टता और सुविधा मिलने की उम्मीद है।
Poonam Report



